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पाकिस्तान सीमा पर भविष्य के महासमर की तैयारी?: तरंग शक्ति में एफ-35ए क्यों खास, जंग के लिए कितना जरूरी?

Tue, 29 Sep 2026 05:19 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पाकिस्तान से लगी सीमा के करीब भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास तरंग शक्ति-2026 शुरू हो चुका है। राजस्थान के पांच एयरबेस पर चल रहे इस अभ्यास में पहली बार अमेरिका का एफ-35ए शामिल हुआ है। चीन के जे-35 और पाकिस्तान को उसकी संभावित आपूर्ति के बीच यह अभ्यास भारत के लिए कितना अहम है? एफ-35ए से वायुसेना और रक्षा वैज्ञानिक क्या सीखना चाहते हैं?

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एफ-35ए - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पाकिस्तान से लगी सीमा के करीब भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास तरंग शक्ति-2026 अब अपने ऑपरेशनल चरण में पहुंच गया है। इस अभ्यास के लिए राजस्थान के पांच एयरबेस सक्रिय किए गए हैं। इस बार अभ्यास की सबसे बड़ी खासियत अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान एफ-35ए की मौजूदगी है। इसके जरिए भारतीय वायुसेना अगली पीढ़ी के नेटवर्क-केंद्रित युद्ध की तकनीक और उसमें अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल को समझने की कोशिश करेगी।

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तरंग शक्ति-2026 में एफ-35ए की मौजूदगी क्यों खास है?
यह पहली बार है जब एफ-35ए भारत में किसी सैन्य अभ्यास में हिस्सा ले रहा है। वायुसेना उपप्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के मुताबिक, तरंग शक्ति अलग-अलग विमानों, उनके पायलटों और उनके साथ काम करने वाली जटिल प्रणालियों के बीच समन्वय को परखने का मौका देता है। यानी अभ्यास का मकसद सिर्फ विमानों की उड़ान या युद्धक क्षमता दिखाना नहीं है, बल्कि यह समझना भी है कि आधुनिक युद्ध में कई तरह की प्रणालियां एक साथ कैसे काम करती हैं।

चीन-पाकिस्तान के स्टील्थ विमानों के बीच एफ-35ए से क्या सीख मिलेगी?
चीन के जे-35 जैसे नए स्टील्थ विमानों के विकास और पाकिस्तान को ऐसे विमानों की संभावित आपूर्ति की चर्चा के बीच पांचवीं पीढ़ी की युद्ध तकनीक भारत के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान एमका अभी तैयार नहीं है। ऐसे में एफ-35ए के साथ अभ्यास से डीआरडीओ, एयरोस्पेस इंजीनियरों और वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
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पांचवीं पीढ़ी का विमान सामान्य लड़ाकू विमान से कितना अलग है?
पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान केवल रडार से छिपने की क्षमता के लिए ही खास नहीं होता। इसे एक तरह के उड़ते हुए सुपर कंप्यूटर की तरह समझा जा सकता है। इसमें एईएसए रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और इंफ्रारेड सेंसर जैसे कई साधनों से मिलने वाली जानकारी को एक साथ जोड़कर पायलट तक पहुंचाने की क्षमता होती है। इससे पायलट को युद्ध के दौरान आसपास के खतरे और हालात की ज्यादा व्यापक जानकारी मिल सकती है।

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