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Tamil Nadu: सीएम स्टालिन की आत्मकथा के बहाने एक मंच कई विपक्षी नेता, राहुल ने साधा मोदी सरकार पर निशाना

Mon, 28 Feb 2022 07:11 PM IST
मेघा चौधरी न्यूज डेस्क,अमर उजाला,चेन्नई

सार

तमिलनाडु में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री स्टालिन की आत्मकथा का विमोचन किया। इस पुस्तक में मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने जीवन के शुरुआती 23 वर्षों की यात्रा का उल्लेख किया है।
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सीएम स्टालिन की किताब का विमोचन करते राहुल गांधी - फोटो : ANI
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विस्तार
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तमिलनाडु में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को मुख्यमंत्री स्टालिन की आत्मकथा का विमोचन किया। विमोचन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, राजद नेता तेजस्वी यादव, जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला चेन्नई ट्रेड सेंटर पहुंचे थे। यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की आत्मकथा के विमोचन के बहाने विपक्ष को एकजुट करने की तैयारी की जा रही है।

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यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि विपक्षी नेता इस कार्यक्रम के बहाने एकत्रित हुए हैं। इस दौरान विपक्षी नेता 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं। 2020 के बिहार चुनाव के परिणाम के बाद तेजस्वी प्रताप और राहुल गांधी ने यहां पहली बार एक साथ मंच साझा किया। उस दौरान दोनों पार्टियों के बीच दरार पैदा हो गई थी। वहीं, मुख्यमंत्री स्टालिन कई बार यह सुझाव दे चुके हैं कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए कोई भी मोर्चा कांग्रेस को बाहर नहीं कर सकता है।

चेन्नई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री यहां आते हैं और तमिलनाडु के लोगों पर कोई और विचार थोपने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें समझ में नहीं आता कि तमिलनाडु केवल 2 शब्द नहीं बल्कि 3,000 साल है। वह राज्य और हमारे देश का अपमान करते हैं। 
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उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग खुद पर शासन नहीं करते हैं, लेकिन यूपी, गुजरात के नौकरशाह उन पर शासन करते हैं। पंजाब में उन्होंने एकतरफा पंजाब से 100 किमी जमीन छीनकर बीएसएफ को दे दी। हमारी दृष्टि विविधता में एकता है, और उनकी दृष्टि अनुरूपता के माध्यम से एकता।

स्टालिन के शुरुआती 23 वर्षों की झलक होगी पुस्तक में
मुख्यमंत्री स्टालिन ने रविवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बताया था कि इस पुस्तक में उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती 23 वर्षों की यात्रा का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में उनके जन्म से लेकर 1976 में आपातकाल के दौरान मीसा (आंतरिक सुरक्षा अधिनियम का रखरखाव) के तहत गई गिरफ्तारी का जिक्र है।

उन्होंने इसमें अपने बचपन के विचार, स्कूल की यादें और अपने सभी अनुभवों को दर्ज किया है। इसमें उनके राजनीतिक भागीदारी शुरू होने का समय भी शामिल है। इसके साथ ही पेरियार, अन्नादुरई और करुणानिधि सहित द्रविड़ आंदोलन के संस्थापक नेताओं द्वारा किए गए संघर्षों का भी उल्लेख किया है।

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