तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल आरएन रवि के बीच कलाईनार विश्वविद्यालय को लेकर जारी विवाद बढ़ता ही रहा है। ऐसे में अब स्टालिन सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिका में राज्य सरकार ने राज्यपाल आरएन रवि द्वारा कलाईनार यूनिवर्सिटी बिल 2025 को राष्ट्रपति के पास भेजने के फैसले को असंवैधानिक और अवैध बताया गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि राज्यपाल ने इस बिल पर कैबिनेट की सलाह को नजरअंदाज कर, उसे राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेज दिया है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 200 का उल्लंघन है। इस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को विधानसभा द्वारा पारित बिलों पर कैबिनेट की सलाह के अनुसार निर्णय लेना होता है।
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समझिए क्या है कलाईनार यूनिवर्सिटी बिल?
बता दें कि यह बिल तमिलनाडु विधानसभा में अप्रैल 2025 में पारित हुआ था। इसमें भरतिदासन यूनिवर्सिटी को दो भागों में बांटकर कलाईनार यूनिवर्सिटी की स्थापना करने का प्रस्ताव है। यह यूनिवर्सिटी कुंभकोणम में बनेगी और इसका उद्देश्य अरियालुर, नागपट्टिनम, तंजावुर और तिरुवरूर जिलों के छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करना है।
इस यूनिवर्सिटी का नाम पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एम करुणानिधि के नाम पर रखा गया है, जो कि मौजूदा मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के पिता हैं। बिल में प्रावधान है कि मुख्यमंत्री स्टालिन यूनिवर्सिटी के पहले कुलपति होंगे।
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दूसरा बिल भी राष्ट्रपति के पास भेजा गया
इतना ही नहीं मामले में राज्यपाल ने दूसरा बिल भी राष्ट्रपति के पास भेजा है, जो कि तमिलनाडु फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी एक्ट में बदलाव से जुड़ा है। इस बदलाव से राज्य सरकार को स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति की नियुक्ति और हटाने का अधिकार मिल जाता।
समझिए क्या है सरकार की मांग?
गौरतलब है कि इस पूरे मामले में राज्य सरकार की मांग है कि राज्यपाल का फैसला अवैध और असंवैधानिक घोषित किया जाए। साथ ही राज्यपाल को निर्देश दिया जाए कि वो अनुच्छेद 200 के तहत कैबिनेट की सलाह के अनुसार ही कार्रवाई करें। मामले में राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री गोवी चेझियान ने पहले बताया था कि नई यूनिवर्सिटी 2025-26 सत्र से शुरू होनी थी। लेकिन राज्यपाल द्वारा बिल पर मंजूरी न देने से काम रुका हुआ है, जिससे छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।