तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्यों के अधिकार छीनकर सभी राज्य सरकारों पर एक तरह का आर्थिक संकट थोप रही है। वह सलेम में पिछले एक साल में अपनी सरकार की उपलब्धियां बताने के लिए एक पार्टी बैठक को संबोधित कर रहे थे। स्टालिन ने कहा कि केंद्र ने राज्य सरकारों से वित्त और कर से संबंधित सभी अधिकार छीन लिए हैं और एक तरह का आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।
स्टालिन ने कहा कि द्रविड़ियन मॉडल, जो ज्ञानवापी मामले और संबंधित दावों व प्रतिद्वंद्वी दलों के प्रति-दावों का परोक्ष संदर्भ प्रतीत होता है, वह कुछ नष्ट नहीं करेगा बल्कि निर्माण करेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह मॉडल किसी को विभाजित नहीं करेगा बल्कि एकजुट करेगा। भाजपा का नाम लिए बिना स्टालिन ने कहा कि कुछ लोग 'अध्यात्मवाद' के आधार पर बनी सरकार पर लगातार झूठे आरोप लगा रहे हैं क्योंकि वे यहां कोई खामी नहीं ढूंढ पा रहे।
'हमारी सरकार सबकी आस्था का सम्मान करती है'
मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमके की सरकार ने कभी भी किसी की आस्था और श्रद्धा के लिए अवरोध नहीं खड़ा किया है और यही रुख जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि ये हमारी सरकार थी जिसने राज्य में मंदिरों की 2500 करोड़ रुपये कीमत की संपत्तियां उन्हें वापस दिलवाई थीं। हाल ही में, तमिलनाडु भाजपा ने एक शैव मठ की पालकी की रस्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए राज्य सरकार को निशाने पर लिया था। बाद में, इस पर से प्रतिबंध हटा दिया गया था।
'केंद्र से अब तक नहीं मिल पाए 21761 करोड़ रुपये'
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चाहती है कि राज्य सरकारें जनता की सेवा न कर पाएं। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को अभी भी केंद्र की ओर से 21,761 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने मांग की कि केंद्र को ईंधन पर उतना कम करना चाहिए जितना साल 2014 में इसके सत्ता संभालने के बाद बढ़ा है। पिछले साल हमारी सरकार ने पेट्रोल पर तीन रुपये कर घटाया था, जिससे 1160 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ था।