देश में कोरोना वायरस के मामलों को बढ़ाने और सरकारी आदेशों की अवहेलना करते हुए बड़ी संख्या में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले 900 विदेशियों को मार्च और अप्रैल में हिरासत में लिया गया। इसमें यूक्रेन में रहने वाला एक 16 साल का बच्चा भी शामिल है।
जनवरी में 16 साल के हुए इस बच्चे को दक्षिण दिल्ली के एक सुविधा केंद्र में हिरासत में रखा गया है। वह दिल्ली के निजामुद्दीन बस्ती में मरकज में शामिल होने वाले 200 अन्य लोगों के साथ था। बता दें कि तब्लीगी जमात में शामिल होने वाले लोगों के मामलों की सुनवाई अलग-अलग अदालतों में चल रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लड़के का कहना है कि वह सात महीनों से भारत में है। ठंडे देश से होने की वजह से उसके लिए भारत की गर्मी के साथ सामंजस्य बिठाना मुश्किल हो रहा है। नेपाल और औरंगाबाद की यात्रा करने के बाद लड़का अपने पिता के साथ 22 मार्च को निजामुद्दीन मरकज में शामिल हुआ था। इसके कुछ दिन बाद ही भारत में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू कर दिया गया था।
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लड़के को पुलिस ने आधिकारिक तौर पर आरोपी नहीं बनाया है लेकिन उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है। उसे अपने पिता के साथ क्वारंटीन हिरासत केंद्र में रखा गया है। उन्हें 31 मार्च को मरकज से निकाला गया था। 28 मई को अदालत के आदेश के अनुसार मरकज में शामिल होने वाले लोगों को क्वारंटीन केंद्रों से रिहा करने के बाद शहर में विभिन्न अदालत द्वारा अनुमोदित सुविधा केंद्रों में रखा जाएगा।
16 साल का लड़का जामिया नगर में स्थित एक अस्थायी डिटेंशन फैसिलिटी (रोकथाम सुविधा केंद्र) में है। उसने कहा, ‘हमें मई में वापस लौटना था। मुझे सितंबर में नए स्कूल जाना था लेकिन अब मैं नहीं कर पाउंगा। मैं यहां की यात्रा का आनंद ले रहा था। मैं पहली बार आया हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं वापस क्यों नहीं जा सकता। मुझे अपनी मां की याद आती है, भले ही मैं उनसे और अपने दो बड़े भाइयों से वीडियो कॉल पर बात करता हूं।’