तमिलनाडु में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 20 वर्षों की भागदौड़ के बाद एक जालसाज को गिरफ्तार कर लिया है। बताया गया है कि वह जालसाज तमिलनाडु के एक गांव में कथित रूप से आध्यात्मिक गुरु के रूप में रह रहा था। बताया गया है कि जालसाज ने सीबीआई से बचने के लिए कई बार अपने नाम बदले। कानून को चकमा देने के लिए वी छलापथि राव ने अपनी कई नकली पहचान बनाई थीं। उसने इस बीच अपना फर्जी आधार कार्ड भी तैयार किया। तमिलनाडु में पकड़े जाने से पहले वह कई राज्यों में रहा। इस दौरान उसने कंप्यूटर ऑपरेटर और ऋण वसूली करने वाले एजेंट के रूप में भी काम किया। अधिकारियों ने बताया कि राव को रविवार को नरसिंहनल्लूर गांव से गिरफ्तार किया गया है। बताया गया है कि राव फिर से किसी अन्य देश में भागने की फिराक में था।
वर्ष 2002 में राव के खिलाफ पहला मामला दर्ज किया गया
सीबीआई ने एक मई, वर्ष 2002 को राव के खिलाफ पहला मामला दर्ज किया था। उस समय वह हैदराबाद में भारतीय स्टेट बैंक की चंदूलाल बिरादरी शाखा में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहा था। बताया गया है कि उस दौरान राव ने मनगढ़ंत कोटेशन और फर्जी वेतन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया और बैंक से 50 लाख रुपये निकाले। इसके बाद राव के खिलाफ वर्ष 2006 में दो आरोप पत्र दायर किए गए। सात वर्ष तक लापता रहने के बाद, राव के परिवार ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इस बीच, राव ने एम विनीत कुमार के नाम से फर्जी आधार कार्ड तैयार किया और दोबारा शादी कर ली। सीबीआई के प्रवक्त ने कहा, ‘राव की पत्नी ने 10 जुलाई, वर्ष 2004 में कमाठीपुरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की। वह भी धोखाधड़ी के मामले में आरोपी थी। सात वर्ष तक राव के लापता रहने के बाद उसकी पत्नी ने सिविल कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में राव को मृत घोषित करने की मांग की गई। इस संबंध में अदालत से भी एक आदेश पारित किया गया था।’ अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद राव को अपराधी घोषित कर दिया गया।
भोपाल के बाद उत्तराखंड में ली शरण
जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा, ‘राव की दूसरी पत्नी ने सीबीआई को बताया कि वह अपनी पहली पत्नी के बेटे के संपर्क में था। इससे पहले कि सीबीआई राव तक पहुंच पाती, वह वर्ष 2014 में भोपाल भाग गया। वहां उसने ऋण वसूली करने वाले एजेंट के रूप में काम किया। इसके बाद वह उत्तराखंड के रुद्रपुर चला गया और वहां एक स्कूल में काम किया।’ सीबीआई की टीम ने राव को पकड़ने के लिए जैसे ही रुद्रपुर में जाल बिछाया, उससे पहले वह वहां से भाग गया।
तमिलनाडु में भी आध्यात्मिक गुरु के रूप में रह रहा था
इसके बाद सीबीआई को जानकारी मिली कि राव औरंगाबाद के वेरुल गांव के एक आश्रम में रह रहा है। यहां उसने फिर से दूसरे नाम से आधार कार्ड बनवाया, जिससे उसकी पहचान करना और ज्यादा मुश्किल हो गया। सीबीआई ने बताया कि औरंगाबाद में राव, स्वामी विधितात्मानंद तीर्थ के रूप में रह रहा था। उसने राजस्थान के भरतपुर की ओर भागने से पहले आश्रम में 70 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। इसके बाद राव वापस तमिलनाडु लौटा और नरसिंहनल्लूर गांव में एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में रहने लगा। इससे पहले कि वह कहीं और भागता, सीबीआई ने उसे दबोच लिया।