Rasayani Baba and Swami Chidanand
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प्रकृति की रचना ईश्वर की अमूल्य देन है। लेकिन आज प्राकृतिक असंतुलन बढ़ रहा है। इसलिए इसकी रक्षा और पेड़-पौधे लगाना ही मानवता और ईश्वर की सच्ची सेवा है। रामजी दास रसायनी बाबा और परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष चिदानंद सरस्वती ने हजारों लोगों को यह संकल्प दिलाया। महरौली स्थित योगशक्ति पीठ मंदिर के प्रांगण में इस संकल्प के साथ श्री शतचंडी महायज्ञ और कार्यक्रम संपन्न हुआ।
श्री योगपीठ में श्री शतचंडी पाठ एवं महायज्ञ का आयोजन हर नवरात्र में होता है। पिछले नौ दिन से इस बार भी श्री शतचंडी पाठ, भंडारा और शाम को भजन-कीर्तन, राम चरित मानस कथा का आयोजन हुआ। इस साल श्री योग शक्तिपीठ ने पर्यावरण की चुनौतियों को देखते वृक्षारोपण अभियान को भी पूजा पाठ के साथ शामिल किया। परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद ने कहा कि प्रकृति से हम सब कुछ लेते हैं, लेकिन बदले में कुछ नहीं देते। प्रकृति और सृष्टि की रचना भी परमात्मा ने ही की है। इसलिए प्रकृति का एकतरफा दोहन और इससे विमुख रहकर ईश्वर की आराधना पूर्ण नहीं हो सकती।
श्री शक्ति योग पीठ के प्रमुख रामजी दास (रसायनी बाबा) ने कहा कि प्रकृति का संवर्धन सामूहिकता से ही संभव है। प्रकृति की रक्षा ही मानवता, राष्ट्र और सृष्टि की रक्षा है। हम देवी की आराधना में उन्हें पुष्प, फल सब अर्पित करते हैं। हमारे शास्त्रों में वृक्ष की पूजा है। इसलिए सबको पेड़-पौधे लगाने और जल संरक्षण में अपना योगदान देने के लिए आगे आना होगा। ऐसा करके हम धर्म की रक्षा और मां भगवती की सच्ची आराधना कर सकते हैं।
श्री योग शक्तिपीठ मंदिर ने 29 सितंबर से श्री शतचंडी पाठ एवं महायज्ञ का आयोजन किया था। इस अनु्ष्ठान में देश के कोने कोने से साधु-संत और महात्माओं ने हिस्सा लिया। परमार्थ निकेतन गुरुकुल के दो दर्जन वेदपाठी विद्यार्थियों, पंडितों आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ महायज्ञ एवं पूर्णाहुति संपन्न हुई।