देश में इन दिनों लोकसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है। विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता एक-दूसरे के खिलाफ खूब बयानबाजी कर रहे हैं। इसी बीच, पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को लेकर बिना नाम लिए सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर निशाना साधा है। सुवेंदु ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल में तैनात केंद्रीय बलों को चुनाव के बाद तीन महीने तक और तैनात रखा जाना चाहिए। उनके इस बयान पर टीएमसी ने भी पलटवार किया है। टीएमसी ने कहा कि उनका बयान पराजयवादी मानसिकता को दिखाता है।
बता दें कि सुवेंदु अधिकारी आज यानी सोमवार को चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक से मुलाकात करने पहुंचे थे। इसके बाद ही उन्होंने यह प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एमसीसी (आदर्श आचार संहिता) हटाए जाने के बाद भी करीब तीन महीनों तक केंद्रीय बलों को बंगाल में रहने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव के बाद की हिंसा को रोकने में मदद मिलेगी।इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी इस मांग को लेकर राज्यपाल सीवी आनंद बोस और राज्य के मुख्य सचिव और केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखेंगे। बता दें कि साल 2021 में हुए विधानसभा चुनावों और 2023 में पंचायत चुनावों के बाद व्यापक हिंसा हुई थी। जिसके कारण राज्य में कई लोगों की मौत भी हुई थी। तब भाजपा ने इसका आरोप टीएमसी सरकार पर लगाया था।
टीएमसी ने किया पलटवार
सुवेंदु अधिकारी के इस बयान को टीएमसी ने पराजयवादी मानसिकता बताया है। टीएमसी ने एक्स पर एक पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा कि सुवेंदु अधिकारी ने मांग की कि एमसीसी (आदर्श आचार संहिता) हटाए जाने के बाद भी केंद्रीय बलों को बंगाल में रहने की अनुमति दी जाए। टीएमसी ने कहा कि वह इसे किसी और से बेहतर जानते हैं कि राज्य में उनकी पार्टी जर्जर स्थिति में है। बंगाल में बीजेपी की कोई राजनीतिक पकड़ नहीं है। इसलिए अपनी घटती प्रासंगिकता को बचाने के लिए भगवा पार्टी को एकमात्र विकल्प केंद्रीय बलों के प्रवास को बढ़ाने का दिखता है।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था को देखते हुए लोकसभा चुनावों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के कुल 92,000 कर्मियों को तैनात किए जाने की संभावना है। यह किसी भी राज्य में सबसे अधिक है।