रिया के खिलाफ नहीं मिले कोई ठोस सबूत
जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि इस मामले में सुशांत सिंह के आवास पर कई बार काल्पनिक सीन दोहराया गया है। इसमें उन लोगों को भी शामिल किया गया, जिन्होंने सबसे पहले सुशांत सिंह राजपूत का शव देखा था। कमरे का दरवाजा कैसे खुला, एंबुलेंस तक ले जाने की स्थिति, आत्महत्या के उस तरीके में शरीर के हिस्से पर कैसे निशान मिलते हैं, इन सबका अनुभव जांच एजेंसी ने एक डमी के साथ किया है। सीबीआई या उससे पहले महाराष्ट्र पुलिस ने जो बात कही थी, अब एम्स के डॉक्टरों की टीम ने भी कुछ वैसा ही कहा है।
टीम को ऐसा कुछ नहीं लगा कि सुशांत की हत्या हुई है। राजपूत के बैंक खातों का फोरेंसिक ऑडिट हुआ। पैसे का लेन-देन कब और किसके साथ हुआ व उसका संदर्भ क्या था, इन बातों की अच्छी तरह छानबीन की गई है। यहां भी जांच एजेंसी को अभी तक की जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिसके जरिए यह साबित हो कि रिया चक्रवर्ती ने एक साजिश के तहत सुशांत राजपूत को आर्थिक फायदे के लिए आत्महत्या के लिए उकसाया था।
रिया ने सुशांत के खाते से जो भी पैसे खर्च किए, वो इतने ज्यादा नहीं हैं कि उसे आत्महत्या का कारण मान लिया जाए। बॉलीवुड में कोई भी बड़ा स्टार, वह चाहे महिला है या पुरुष, दोस्तों के लिए इतनी राशि खर्च कर सकता है। राजपूत के पिता ने बिहार पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में आरोप लगाया था कि अभिनेता के बैंक खातों से 15 करोड़ रुपये निकाले गए थे। ऐसा कुछ नहीं था। पिछले पांच वर्षों के दौरान राजपूत के खातों में करीब 72 करोड़ रुपये की राशि रही थी। यहां से रिया द्वारा 55 लाख रुपये खर्च करने की बात सामने आई है।
अब सीबीआई नए एंगल से करेगी जांच
अब इस केस की जांच नए एंगल से होगी। जांच एजेंसी के सूत्रों ने यह पुष्टि कर दी है। सुशांत सिंह राजपूत को काम दिलाने वाले कई बिचौलिए, जिनमें कुछ निर्माता निर्देशक भी शामिल हैं, उनसे पूछताछ होगी। यह जांच पहले ही कर ली गई है कि सुशांत सिंह को किसी का बकाया नहीं देना था। हालांकि एक बार सुशांत ने बैंक को लिखा था कि उसके खाते से जो लोग पैसा निकाल सकते हैं, वह उनकी लेन-देन प्रक्रिया पर नियंत्रण करना चाहते हैं।
जांच एजेंसी अब सुशांत के मैनेजर और दूसरे करीबियों से पूछताछ कर यह पता लगाएगी कि क्या किसी निर्माता या निर्देशक ने उन्हें ठेस पहुंचाई थी। फिल्म साइन करने को लेकर किसके साथ कैसा व्यवहार रहा था, इस एंगल से भी जांच होगी। पहले सुशांत को काम देने की बात हुई और आखिरी मौके पर हीरो बदल दिया गया हो। ऐसे और दूसरे कौने से पेशेवर कारण हो सकते हैं, जिनके आधार पर कोई व्यक्ति इतना ज्यादा प्रताड़ित या परेशान हो जाए कि वह आत्महत्या जैसा कदम उठा ले। बॉलीवुड में पेशेवर प्रतिद्वंद्विता और भाई-भतीजावाद की कहानी का राजपूत पर कोई असर हुआ था, एजेंसी इस पहलू पर भी गौर करेगी।