नैनीताल (डॉ. गिरीश रंजन तिवारी)। बृहस्पतिवार को ग्रहण के दौरान सूर्य एक आग के छल्ले जैसा दिखेगा। इसका कारण इन दिनों पृथ्वी से सूर्य अपेक्षाकृत निकट और चंद्रमा सामान्य से दूर यानी सूर्य के करीब है। ऐसे में चंद्रमा सूर्य को पूरा नहीं ढक पाएगा और इसकी परिधि नजर आती रहेगी।
नैनीताल के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेस के वैज्ञानिक शशिभूषण पांडे ने बताया कि एन्युलर (कुंडलाकार) सूर्यग्रहण में चंद्रमा सूर्य की परिधि के अलावा शेष भाग को ढक लेता है। ऐसे में इसकी परिधि रिंग ऑफ फायर जैसी दिखाई देती है।
भारत में इससे पहले कुंडलाकार सूर्यग्रहण 15 जनवरी 2010 को देखा गया था और अगला 21 जून 2020 को दिखाई देगा। खास बात है कि अगले 100 साल में भारतीयों को महज छह सूर्यग्रहण ही देखने को मिलेंगे। भारत में वर्ष 2020, 2031, 2034, 2064, 2085 तथा 2114 में सूर्यग्रहण दिखाई देंगे।
कुरुक्षेत्र में आज खास सूर्यग्रहण मेला
सूर्यग्रहण के दौरान कुरुक्षेत्र में बृहस्पतिवार को विश्वविख्यात मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु सन्निहित सरोवर और ब्रह्मसरोवर पर मोक्ष की डुबकी लगाने पहुंचेंगे। नेपाल, हिमाचल, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और अन्य प्रांतों के श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो चुका है। हालांकि महाभारतकालीन 48 कोस की परिधि में स्थित अन्य तीर्थों पर भी स्नान होगा। कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण का स्पर्श सुबह 8:15 बजे और मोक्ष सुबह 10:55 बजे होगा।