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सर्वे में खुलासा: पीएम मोदी के मुकाबले दीदी ज्यादा पसंद, हिंदुओं ने भी जताया पहले से ज्यादा भरोसा

Fri, 07 May 2021 06:24 PM IST
योगेश साहू राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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पीएम मोदी, सीएम ममता बनर्जी - फोटो : ANI
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पश्चिम बंगाल की सत्ता पर ममता बनर्जी तीसरी बार काबिज हो गई है। चुनाव के बाद हुए पोस्ट पोल सर्वे में भी ममता बनर्जी कई मायनों में पीएम मोदी से आगे नजर आई है। इन चुनावों मे सीएए, एनआरसी समेत कई मुद्दों का असर भी देखना को मिला। असम में 53 प्रतिशत लोग और केरल में 62 प्रतिशत लोग सीएए के विरोध में नजर आए। जबकि बंगाल में 38 प्रतिशत और तमिलाडु में 36 प्रतिशत लोगों ने सीएए का विरोध किया हैं।

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लोकनीति-सीएसडीएस सर्वे के पोस्ट पोल सर्वे के अनुसार, असम में 75 प्रतिशत लोग चाहते है कि एनआरसी लागू हो। लेकिन राज्य के 26 प्रतिशत लोग एनआरसी की प्रक्रिया से खुश नहीं है। उनका मत है कि एनआरसी की जो प्रक्रिया है उसमें बदलाव होना चाहिए। पश्चिम बंगाल में 40 प्रतिशत लोग एनआरसी के पक्ष में है। केरल में 57 प्रतिशत और तमिलनाडु में 26 प्रतिशत लोग एनआरसी के विरोध खड़े है।

लोकनीति-सीएसडीएस के राजनीतिक शोधकर्ता मंजेश राणा ने अमर उजाला को बताया कि, असम, केरल, बंगाल और तमिलनाडु में हमारी टीम ने पूरे कोविड प्रोटोकाल को ध्यान में रखते हुए ये पोस्ट पोल सर्वे किया। हमारी टीम ने सर्वे के दौरान लोगों से वन टू वन चर्चा कर ये परिणाम निकाला है। बंगाल में ममता की लोकप्रियता पीएम मोदी से कहीं ज्यादा है।
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सर्वे के दौरान जब हमने लोगों से पूछा कि, सीएम ममता और पीएम मोदी में सबसे ज्यादा वे किसे पसंद करते है। इस पर राज्य के 45 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ममता दीदी को मोदी से अधिक पसंद करते है। जबकि 29 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे मोदी को ममता से ज्यादा पसंद करते है।

राणा ने आगे बताया कि बंगाल में 52 प्रतिशत लोग मोदी सरकार के कामकाज से संतुष्ट नजर आए। जबकि 34 प्रतिशत लोग केंद्र सरकार के काम से असंतुष्ट थे। वहीं राज्य में 68 प्रतिशत लोग ममता के काम से खुश है। सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि राज्य का अगला सीएम कौन होना चाहिए। इस पर 42 प्रतिशत लोगों ने ममता बनर्जी का नाम लिया। महज 5 प्रतिशत लोग भाजपा के दिलीप घोष को सीएम देखना चाहते थे।

सर्वे में पश्चिम बंगाल, केरल और असम के लोग राज्य में पुरानी सरकार को फिर से मौका देने के पक्ष में नजर आ रहे थे। बंगाल में 53 प्रतिशत, केरल में 51 प्रतिशत और असम में 43 प्रतिशत लोग वर्तमान सरकार को दोबारा चुनने के पक्ष में थे। लेकिन तमिलनाडु में सरकार विरोध लहर हावी रही। जिसका फायदा विरोधी दल को मिला। तमिलनाडु में 49 प्रतिशत लोग सरकार को बदलने के पक्ष में नजर आए।

इस सर्वे में लोगों ने डबल इंजन सरकार के फार्मूले पर भी खुलकर अपनी राय रखी। पश्चिम बंगाल में 32 प्रतिशत लोग राज्य में डबल इंजन सरकार के फार्मूले से पूरी तरह से असहमत नजर आए। बंगाल की जनता मानना है कि ऐसा कोई जरूरी नहीं है कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार बने। जबकि 26 प्रतिशत लोग राज्य में डबल इंजन सरकार बनाने के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं थे। असम में 63 फीसदी लोग चाहते थे कि राज्य में फिर से डबल इंजन की सरकार बने।

महिलाओं ने दिया ममता का साथ
बंगाल विधानसभा चुनाव में 50 प्रतिशत हिंदुओं ने भाजपा के पक्ष में वोट दिया जबकि 39 प्रतिशत ने टीमएसी को। 2019 लोकसभा चुनावों के हिंदु वोटों में टीमएसी को 7 प्रतिशत वोट बढ़त मिली है। जिसका सीधा नुकसान भाजपा को हुआ है। 2019 के लोकसभा चुनाव में 57 प्रतिशत हिंदुओं ने भाजपा को वोट दिया और 32 प्रतिशत ने टीएमसी को।

इसके आलवा इन चुनावों में 50 प्रतिशत महिलाओं ने ममता को वोट दिया। जबकि 37 प्रतिशत ने भाजपा को वोट दिया। वहीं 46 प्रतिशत पुरुष ने टीमएसी के पक्ष में नजर आए। जबकि टी 40 प्रतिशत पुरुषों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया।

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