शायद आप यकीन न करें, लेकिन सच यही है कि देश का 52 फीसदी किशोर नमकीन और चिप्स पर ही निर्भर है। रोजाना इनका खानपान इन्हीं चीजों पर रहता है। यही नहीं 49.3 फीसदी किशोर तो दिन भर में तली हुई चीजों से ही अपना पेट भर रहे हैं। यह हाल सिर्फ किशोरों ही नहीं बल्कि देश के 98 फीसदी वयस्क हरी सब्जियों और फलों को दूर रखते हैं।
यह खुलासा देश में पहली बार संक्रामक रोगों पर हुए सर्वे की रिपोर्ट में हुआ है। इसमें कहा गया कि अगर यही हाल रहा तो अगले 20 से 30 साल में यह लोग कई गंभीर बीमारियों का सामना कर सकते हैं।
सोमवार को जारी राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन निगरानी सर्वेक्षण (एनएनएमएस) 2017-18 की रिपोर्ट के अनुसार मधुमेह, रक्तचाप जैसी बीमारियों का हर आयुवर्ग पर प्रभाव पड़ रहा है। 15 से 17 और 18 से 69 वर्ष की आयु के लोगों पर हुए सर्वे के दौरान अलग अलग राज्यों में 1402 घर और 1531 किशोरों को शामिल किया। इसमें पता चला कि 19 फीसदी किशोर नूडल्स, 6.4 फीसदी पिज्जा/बर्गर, 18.2 फीसदी कोल्डड्रिंक्स, 6.5 फीसदी एनर्जी ड्रिंक पर निर्भर रहते हैं। केवल 33.9 फीसदी किशोर ने स्वीकार किया कि वह प्रतिदिन ताजा फल या उनके जूस का सेवन करते हैं। इसी का परिणाम है कि 6.2 फीसदी अतिरिक्त वजन और 1.8 फीसदी मोटापा ग्रस्त पाए गए हैं।
ऐसे हुआ सर्वे
सितंबर 2017 से जुलाई 2018 के बीच हुए सर्वे को आईसीएमआर और एनसीडीआईआर की निगरानी में देश के 11 संस्थानों के साथ किया गया। देश के 28 राज्यों के 348 जिलों में 300 शहर और 300 गांवों में 12 हजार परिवारों से बातचीत के बाद सर्वे रिपोर्ट तैयार की गई। इस दौरान तीन हजार लोगों के यूरिन सैंपल की जांच भी की गई। सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रिपोर्ट जारी करते हुए गैर संक्रामक रोगों के खिलाफ अभियान छेड़ने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण माना।
गैर संक्रामक रोगों से लड़ाई में मिलेगी मदद
बंगलूरू स्थित एनसीडीआईआर के निदेशक डॉ. प्रशांत माथुर का कहना है कि ‘गैर संक्रामक रोगों को लेकर देश में साल 2011 में संस्थान की शुरुआत हुई थी। देश भर में 600 संगठनों के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा है। दुनिया भर में संक्रामक रोगों के खिलाफ मुहिम शुरू होने पर भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने सबसे पहले फ्रेमवर्क तैयार कर 10 लक्ष्य निर्धारित किए और उस पर काम शुरू किया है। यह सर्वे हमें इस लड़ाई को सफल बनाने में काफी मददगार होगा।'
इनमें बढ़ रहा रक्त ग्लूकोज
इनके अलावा 30 से 69 वर्ष की आयु के लोगों में से 26 फीसदी में रक्त ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने का पता चला है। हालांकि इनमें से 47 फीसदी लोग अपनी परेशानी से अवगत हैं लेकिन उनमें से भी 38 फीसदी ही उपचार ले रहे हैं। इसी तरह 52 फीसदी में रक्तचाप की बढ़ोत्तरी मिली है। इनमें से केवल 29 फीसदी ने ही अपनी जांच कराई है।
कैंसर जांच से घबरा रहीं महिलाएं
सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं कि सरकार स्तन और गर्भाश्य कैंसर को लेकर अभियान चला रही है लेकिन महिलाएं यह जांच कराने के लिए आगे नहीं आ रही हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्थिति और भी ज्यादा खराब है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार केवल 1.1 फीसदी महिलाओं ने स्तन या गर्भाश्य ग्रीवा कैंसर की जांच में हिस्सा लिया है।