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सूरत में कूड़े प्रबंधन की इस खास स्टाइल ने दिखाई दिल्ली सहित अन्य शहरों को राह

Mon, 02 Jul 2018 09:29 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत
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गुजरात का शहर सूरत दिल्ली सहित देश के उन बड़े शहरों के लिए एक उदाहरण है जहां कचरे का ठीक तरह से निपटारा नहीं होता है। दिल्ली-एनसीआर में आपको कूड़ेदान से बाहर आता हुआ कचरा लगभग रोजाना ही दिखाई देता होगा। यहां कई-कई दिनों तक कचरा हटाने के लिए निगम के कर्चमारी नहीं आते हैं जिसकी वजह से आस-पास के घरों को बदबू वाली हवा में रहने को मजबूर होना पड़ता है। लेकिन सूरत में कूड़ेदान के 70 प्रतिशत भरने के बाद ही उसे साफ करने के लिए कर्मचारी मौके पर पहुंच जाते हैं।

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सूरत के नगर निगम ने शहर में 43 अंडरग्राउंड कूड़ेदान लगा रखे हैं। हर कूड़ेदान की क्षमता 1.5 टन कचरा ढोने की है। इसे शहर के स्मार्ट सिटी अभियान के तहत लगाया गया है। इन कूड़ेदानों में एक सेंसर लगा है जिसकी वजह से 70 प्रतिशत कचरा भरते ही यह कंट्रोल रुम को अलर्ट भेज देता है। इन कूड़ेदानों को फुटपाथ पर लगाया गया है। इनमें दो रास्ते बनाए गए हैं एक व्यक्तियों के लिए और दूसरा निगम की गाड़ियों के लिए ताकि वह कचरा निकाल सकें। 

सूरत नगर निगम के कमिश्नर एम थेन्नारसन ने कहा, 'हम इस तरह के 75 और कूड़ेदान लगाने वाले हैं। यह पहले कुछ सीमित क्षेत्र में शुरू किया गया। अब बहुत सारे पार्षद इसकी मांग कर रहे हैं। एक बार लोगों को इसका अच्छा अनुभव हो जाए और इसका परिणाम देख लें तो उन्हें बेहतर सुविधा दी जाएगी। हम इसे दूसरे क्षेत्रों में भी लगाएंगे।' थेन्नारसन सूरत स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के निदेशक और अध्यक्ष भी हैं। दंभल जोकि सूरत के कपड़ा बाजार क्षेत्र में आता है वहां बड़े-बड़े मेटल कूड़ेदानों को क्रेन की मदद से खाली किया जाता है। कोई भी व्यक्ति कचरे को हटाने के लिए हाथ इस्तेमाल नहीं करता है। 
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थेन्नारसन के सहायक सीवाई भट्ट ने कहा कि यह नगर निगम के लिए बेहतरीन विकल्प हैं और यह हवा में कोई बदबू भी नहीं छोड़ता है। इन कूड़ेदानों का संचालन करने के लिए निजी कंपनी को रखा गया है। एक शख्स ने कहा, 'यह एक अच्छी पहल है। यहां तक की जब बारिश होती है पानी अंदर नहीं जाता है। ऐसी ही पहल दूसरे क्षेत्रों मे भी की जानी चाहिए।' सूरत रोजाना 2,100 टन का कचरा पैदा करता है और उसमें से लगभग 800 टन को परिष्कृत और उपचारित किया जाता है। एक अधिकारी ने दावा किया कि बाकी के बचे हुए कचरे का वैज्ञानिक रूप से निपटारा किया जाता है। थेन्नारसन ने कहा कि वह एक ऐसी प्रणाली को इंस्टॉल करेंगे जिससे रोजाना 2,000 टन कचरे का निपटान किया जा सके।

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