डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी थे उस्ताद के मुरीद
शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की काशी में उनको याद करने के बहाने शहनाई गूंज उठी। उस्ताद की सौंवी जयंती पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार उनको लय-ताल के जरिए काशी में याद कर रही है। शनिवार की शाम गायन, वादन की प्रस्तुतियों पर देर रात तक संगीत प्रेमी झूमते रहे।
नागरी नाटक मंडली में आयोजित चार दिनी संगीत महोत्सव ‘सुर-बनारस’ संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित है। महापौर राम गोपाल मोहले ने दीप जलाकर सुर-बनारस संगीत महोत्सव का उद्घाटन किया। शुरुआत हुई दिल्ली के जगदीश प्रसाद की शहनाई से।
उन्होंने राग मधुवंती की अवतारणा की। तीन ताल में निबद्ध बंदिश पर विलंबित लय के बाद मध्य लय की बंदिश बजाने के बाद उन्होंने दीपचंदी ताल मं होरी की धुन बजाई। इनके बाद हरिमोहन श्रीवास्तव ने बांसुरी पर राग हेमवती की अवतारणा की। फिर रूपक ताल में उन्होंने दूसरी बंदिश बजाकर मुग्ध किया। इनके बाद पं. देवाशीष डे ने राग वसंत में विलंबित एक ताल में गायन प्रस्तुत किया।
इसके बाद राग वसंत बहार और फिर राग काफी में उन्होंने होरी की प्रस्तुति की। तबले पर संगत की पं. किशोर मिश्र ने। इनके बाद लोकेश आनंद ने शहनाई पर राग मधुकौस की अवतारणा की। फिर उन्होंने तीन ताल में ठुमरी की बंदिश बजाकर संगीत प्रेमियों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। इनके बाद राकेश चौरसिया ने बांसुरी पर रागों-बंदिशों की अवतारणा से लोगों को मुग्ध किया। संचालन किया साधना श्रीवास्तव ने।