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Supreme Court Updates: कैश विवाद में घिरे जज पर एफआईआर की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

Wed, 14 May 2025 02:14 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। मामले में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ता और वकील मैथ्यू नेडुमपारा से कहा कि वे नियमित मेंशनिंग प्रक्रिया का पालन करें।

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गौरतलब है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अब किसी भी मामले की तत्काल सुनवाई के लिए मौखिक अनुरोध स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके लिए पहले ईमेल के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में आवेदन करना होगा। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि इन-हाउस जांच समिति ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ लगे नकदी बरामदगी मामले में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया है। 

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आपराधिक जांश शुरू करने की मांग
हालांकि पूर्व CJI ने न्यायमूर्ति वर्मा से स्वेच्छा से इस्तीफा देने को कहा था, लेकिन जब उन्होंने इनकार किया तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बारे में पत्र भी लिखा गया। मैथ्यू नेडुमपारा और तीन अन्य की याचिका में मांग की गई है कि आंतरिक जांच के नतीजे सामने आने के बाद अब आपराधिक जांच शुरू की जानी चाहिए, क्योंकि केवल आंतरिक अनुशासनात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।

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नए वक्फ कानून की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संविधानिक वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। यह मामला चीफ जस्टिस (सीजेआई) बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसिह के समक्ष सुनवाई के लिए रखा जाएगा। पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी, लेकिन वह 13 मई को पदमुक्त हो गए। 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह आश्वासन लिया था कि वक्फ संपत्तियों को डीनोटिफाई नहीं किया जाएगा और न ही केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्ड में नियुक्तियां की जाएंगी।

केंद्र सरकार ने कोर्ट के इस प्रस्ताव का विरोध किया था कि वक्फ संपत्तियों की डीनोटिफिकेशन को लेकर कोई अंतरिम आदेश पारित किया जाए, साथ ही गैर-मुसलमानों को केंद्रीय वक्फ परिषद और बोर्ड में शामिल करने के प्रावधान पर रोक लगाई जाए। 25 अप्रैल को केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 का बचाव करते हुए 1,332 पन्नों का हलफनामा दायर किया था

आईएस के प्रति हमदर्दी रखने वाले युवक की जमानत रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने आतंकी समूह आईएस के प्रति हमदर्दी रखने के आरोपी व्यक्ति की जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ सख्त आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था।

जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने अम्मार अब्दुल रहमान को जमानत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि उसने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है। पीठ ने कहा कि आरोपी को 4 अगस्त, 2021 को गिरफ्तार किया गया था और मुकदमा अभी समाप्त होना बाकी है। ऐसा कोई मामला रिकॉर्ड में नहीं लाया गया जिससे पता चले कि उसने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। पीठ ने कहा, अभियोजन पक्ष को 160 से अधिक गवाहों से पूछताछ करनी है। अब तक 44 से पूछताछ की जा चुकी है। मुकदमे का निष्कर्ष निकलने में अभी काफी समय लगेगा। पीठ ने कहा, प्रतिवादी को एक विचाराधीन कैदी के रूप में लगभग तीन साल हिरासत में बिताने के बाद जमानत पर रिहा किया गया है। इसके अलावा वह हर सुनवाई में ट्रायल कोर्ट में पेश हुआ। ऐसे में हमें उसे दी गई जमानत रद्द करने का कोई कारण नहीं दिखता।

एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि आरोपी युवा है और प्रतिबंधित आतंकी समूह आईएस का समर्थक होने के अलावा उसकी कोई बड़ी भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी ने जांच में सहयोग किया और नियमित रूप से ट्रायल कोर्ट में पेश हुआ। हालांकि, भाटी ने ट्रायल लंबित रहने तक विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट के लिए आवेदन करने की आरोपी की याचिका पर आपत्ति जताई। पीठ ने मामले की सुनवाई लंबित रहने के दौरान तथा अदालत की पूर्व अनुमति के बिना आरोपी के विदेश यात्रा करने पर रोक लगा दी।
 

फुटपाथ पैदल यात्रियों का सांविधानिक अधिकार, अतिक्रमण हटाना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पैदल यात्रियों के लिए उचित फुटपाथ सुनिश्चित करने के लिए गाइडलाइंस तैयार करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ को पैदल यात्रियों के लिए सांविधानिक अधिकार बताया। जस्टिस एएस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि फुटपाथों की गैरमौजूदगी में पैदल यात्रियों को सड़कों पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे वे हादसों और जोखिमों के शिकार हो जाते हैं। पीठ ने कहा कि नागरिकों के लिए सही फुटपाथ होना जरूरी है। ये इस तरह बने होने चाहिए कि दिव्यांग व्यक्तियों के लिए भी सुलभ हों और अतिक्रमण हटाना जरूरी है। फुटपाथ का इस्तेमाल करने का पैदल यात्रियों का अधिकार संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत संरक्षित है। अदालत में एक अर्जी में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी, जिसमें फुटपाथों की कमी और अतिक्रमण को उजागर किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने एलीजीबीटीक्यू, यौनकर्मियों के रक्तदान से रोक केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने एलजीबीटीक्यूआईए प्लस समुदाय, समलैंगिक पुरुषों और यौनकर्मियों को रक्तदान करने से रोकने पर केंद्र से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने रोक वाले चिकित्सा दिशानिर्देशों में पूर्वाग्रह को दूर करने के लिए विशेषज्ञों से राय लेने को भी कहा है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ एलजीबीटीक्यूआईए प्लस समुदाय के ऐसे व्यक्तियों की ओर से रक्तदान पर पूर्ण प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिकाओं पर कार्रवाई कर रही थी। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, क्या हम एक तरह का अलग-थलग समूह नहीं बना रहे हैं? इन तरीकों से कलंक, पक्षपात और पूर्वाग्रह सभी बढ़ रहे हैं। भाटी ने कहा कि याचिकाओं में जिन दिशा-निर्देशों को चुनौती दी गई है, वे ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से जारी किए गए थे, जिसने इन श्रेणियों को उच्च जोखिम वाला माना था तथा उन्हें रक्तदान करने से रोक दिया था।

सुप्रीम कोर्ट कानूनी सेवा समिति से साढ़े तीन हजार कैदियों ने मांगी सहायता
देशभर में 3,500 से अधिक कैदियों ने सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति से कानूनी सहायता मांगी है। समिति अपनी ओर से कानूनी सेवाएं प्रदान करने की प्रक्रिया में है। एक बयान के मुताबिक, 5 मई तक लगभग 3,800 कैदियों ने औपचारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (एससीएलएससी) से कानूनी सहायता प्राप्त करने का अनुरोध किया। एससीएलएससी ने कहा, सभी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों (एसएलएसए) और जेल विभागों के सहयोग से 10 जनवरी, 2025 को शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य उन कैदियों के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना है, जिनको कानूनी उपाय होने के बावजूद प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता है।
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चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून को चुनौती वाली याचिकाओं की सुनवाई टली
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वह चाहते तो हैं कि 24 घंटे काम कर सकें। प्रति रात 50 फाइलें पढ़ने के बाद... इस नियमित मामले की सुनवाई के लिए कितनी ऊर्जा बचती है। शीर्ष अदालत ने इस टिप्पणी के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई बुधवार को स्थगित कर दी। इस कानून में सीजेआई को चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से हटा दिया गया था। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने संकेत दिया कि वह अगले हफ्ते इस मामले की सुनवाई कर सकती है। एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा कि मामले की आज और कल सुनवाई की जाए और मामले का निपटारा कर दिया जाए। इस पर पीठ ने कहा, कल तीन जजों की पीठ आंशिक रूप से मामले की सुनवाई करेगी।
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