सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि जैविक पिता की मृत्यु के बाद दोबार शादी करने वाली मां बच्चे का उपनाम तय कर सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला बच्चे को अपने नए परिवार में शामिल भी कर सकती है। जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए यह फैसला सुनाया।
इससे पहले हाईकोर्ट ने एक मां को बच्चे का उपनाम बदलने और अपने नए पति का नाम केवल सौतेले पिता के रूप में रिकॉर्ड में दिखाने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह का निर्देश एक मायने में क्रूर और नासमझी वाला है। यह बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य और आत्मसम्मान को प्रभावित करता है। यह अपील पति की मृत्यु के बाद दूसरी शादी करने वाली मां द्वारा बच्चे को दिए जाने वाले उपनाम को लेकर विवाद से संबंधित थी।
बच्चे के उपनाम को बहाल करने के लिए मां ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि जहां तक बच्चे के पिता के नाम का संबंध है, जहां कहीं भी रिकॉर्ड की अनुमति हो, प्राकृतिक पिता का नाम दिखाया जाएगा और ऐसी अनुमति नहीं हो तो मां के नए पति के नाम का सौतेले पिता के रूप में उल्लेख किया जा सकता है।
ललित मोदी, उनकी मां बीना मोदी ने न्यायालय से कहा
दूसरी ओर, आईपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी और उनकी मां बीना मोदी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि परिवार में लंबे समय से लंबित संपत्ति विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता का कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। ऐसे में कोर्ट से आग्रह है कि अदालत में ही इस मामले का फैसला किया जाए। सीजेआई एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने हालांकि ललित मोदी की ओर से पेश हरीश साल्वे और एएम सिंघवी सहित वरिष्ठ वकीलों और उनकी मां बीना मोदी की ओर से पेश कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी को विवाद के समाधान की संभावना तलाशने और उसे सूचित करने के लिए कहा।
जस्टिस खानविलकर की विदाई शुक्रवार को
वहीं, सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को न्यायमूर्ति एएम खानविलकर सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। जस्टिस खानविलकर आधार मामले और 2002 के गुजरात दंगो में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी व 63 अन्य को एसआईटी से मिली क्लीन चिट को बरकरार रखने जैसे कई महत्वपूर्ण मामलों पर आए फैसलों में शामिल रहे। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तारी करने, संपत्ति कुर्क करने, तलाशी लेने और जब्ती कार्रवाई करने की प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों को बरकरार करने का फैसला सुनाने वाले न्यायमूर्ति खानविलकर शीर्ष अदालत की कई संविधान पीठ का हिस्सा रहे, जिन्होंने महत्वपूर्ण निर्णय दिए।