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SC: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश ने किया शिशु गृह का उद्घाटन, बोले- सुरक्षित और बेहतर माहौल बनाना मकसद

Thu, 29 Aug 2024 10:49 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि अन्य संगठनों को इससे सीख लेनी चाहिए। महिलाओं को प्रोत्साहित करने का यह एक अच्छा तरीका है। शिशुगृह का उद्घाटन करने के बाद मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ मामलों की सुनवाई शुरू की।
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डीवाई चंद्रचूड़ - फोटो : ANI
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विस्तार
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मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में शिशुगृह का उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि यहां बच्चों के लिए खेलने की जगह, सोने की जगह और एक भोजन क्षेत्र है। शिशुगृह का एकमात्र उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को न्यायिक क्षेत्र में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना और एक सुरक्षित और बेहतर माहौल बनाना है।
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चंद्रचूड़ ने कहा, "हमारे पास कई सारे युवा वकील रोज काम करने आते हैं। हमारे पास 2500 सदस्यों का स्टाफ है। पुराना शिशुगृह 198 वर्गमीटर का था। यह शिशुगृह 450 वर्गमीटर में फैला हुआ है। यहां वकीलों और स्टाफ के 100 बच्चे रह सकते हैं। इसका उद्देश्य एक सुरक्षित और बेहतर माहौल बनाना है।" उन्होंने आगे कहा, "इस शिशुगृह में बच्चों के लिए खेलने, खाने और सोने की जगह है। इसका लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को बच्चों की चिंता किए बिना न्यायिक क्षेत्र में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।"

मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि अन्य संगठनों को इससे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, दूसरे संगठनों को हमसे सीख लेनी चाहिए, क्योंकि महिलाओं को प्रोत्साहित करने का यह एक तरीका है, जहां बच्चे सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों में रह सकते हैं। शिशुगृह का उद्घाटन करने के बाद मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने मामलों की सुनवाई शुरू की। उन्होंने कहा, "माफी चाहता हूं कि कार्यवाही शुरू करने में समय लगा। हमने युवा पुरुष और महिलाओं के लाभ के लिए शिशुगृह का उद्घाटन किया। इससे पहले जो शिशुगृह था, उसमें 30 बच्चे ही रह सकते थे, लेकिन अब नए वाले में 100 बच्चे रह सकते हैं।" 
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इससे पहले डीवाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के ब्रांच का भी उद्घाटन किया। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश के साथ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल भी थे। 



 

अधिवक्ता तेजस धीरेनभाई कारिया को बनेंगे दिल्ली HC में जज, SC कॉलेजियम ने सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए अधिवक्ता तेजस धीरेनभाई कारिया के नाम की सिफारिश की है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और बीआर गवई सहित शीर्ष अदालत के कॉलेजियम ने कहा कि न्याय विभाग द्वारा प्रदान किए गए इनपुट से संकेत मिलता है कि उम्मीदवार की अखंडता के बारे में कुछ भी प्रतिकूल बात सामने नहीं आई है। उम्मीदवार की उम्र के संबंध में सामने आया है कि वह 45 वर्ष की आयु सीमा को पूरा करता है। कॉलेजियम ने कहा कि उम्मीदवार मध्यस्थता कानून में विशेषज्ञ है और मध्यस्थता कानून के मामलों के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में विशेष हैंडलिंग की आवश्यकता है। 25 अक्टूबर 2023 को दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने अपने दो वरिष्ठतम सहयोगियों के परामर्श से सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से अधिवक्ता कारिया के नाम की सिफारिश की थी। 

याचिका को कानूनी दुस्साहस बता अपीलकर्ता पर लगाया 1.2 लाख जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने एक अपील को कानूनी दुस्साहस बताते हुए अपीलकर्ता पर 1.2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले को आगे बढ़ाने से मद्रास हाईकोर्ट का बहुमूल्य न्यायिक समय बर्बाद हुआ। शीर्ष अदालत एक ऋण विवाद और ऋणदाता के पक्ष में देनदार की ओर से संपत्तियों को गिरवी रखने के परिणामी विवाद में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बी गोवर्धन की अपील पर सुनवाई कर रही थी। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को खारिज करते हुए न्यायिक समय बर्बाद करने के लिए अपीलकर्ता गोवर्धन की आलोचना की। जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि कानूनी दुस्साहस के कारण हाईकोर्ट का कीमती समय बर्बाद हुआ, इसलिए हम अपीलकर्ता पर 1.2 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हैं। जुर्माना छह सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराया जाए।

हत्या के आरोपी को पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने प्रेमिका की मदद से हत्या करने के आरोपी विवाहित व्यक्ति को तीन महीने के भीतर पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट को गवाहों के बयान का इंतजार करना चाहिए था। इसमें वे गवाह भी शामिल हैं जिन्होंने आरोपी को घटास्थल पर देखने का दावा किया और उसके विवाहेत्तर संबंध होने की भी जानकारी दी थी। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस उज्ज्ल भुइयां की पीठ ने 20 अगस्त को दिए आदेश में कहा, चूंकि हाईकोर्ट ने जमानत देने में जल्दबाजी दिखाई है, इस आदेश को खारिज किया जाता है। आरोपी प्रीतेश कुमार को दो हफ्तों में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जाता है। राज्य सरकार के वकील ने पीठ को आश्वासन दिया कि सुनवाई की अगली दो तारीखों पर निजी गवाहों को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। 
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झारखंड जमीन घोटाले के आरोपी का बैंक स्टेटमेंट मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी संपत्ति दस्तावेज तैयार करके रांची में भारतीय सेना की 4.55 एकड़ जमीन की बिक्री से जुड़े वित्तीय लेनदेन का पता लगाने के लिए एक आरोपी के बैंक स्टेटमेंट मांगे। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी हैं और फिलहाल जमानत पर हैं। शीर्ष अदालत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें झारखंड हाईकोर्ट के 28 नवंबर, 2023 को सह-आरोपी दिलीप घोष को जमानत दिए जाने को चुनौती दी गई है। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने दिलीप घोष के वकील एस नागमुथु से कहा, आप शाम तक आरोपी का बैंक स्टेटमेंट पेश करें। इस पर शुक्रवार सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने मामले को बाद की तारीख पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के वकील के अनुरोध को ठुकराते हुए कहा कि इस पर शुक्रवार को ही सुनवाई होगी। ईडी के अनुसार, भारतीय सेना से जुड़े 4.55 एकड़ जमीन को गैर-मालिकों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर बेच दिया। उसने कहा कि रांची के बरियातू मुहल्ले के निवासी अफसर अली और उसके साथियों ने कोलकाता में रजिस्ट्रार ऑफ एश्योरेंस (रिकॉर्ड) के कार्यालय में प्रफुल्ल बागची के नाम से एक फर्जी दस्तावेज तैयार किया और दावा किया कि जमीन प्रफुल्ल बागची की है। कुछ आरोपियों ने संपत्ति के संबंध में ‘होल्डिंग नंबर’ प्राप्त कर लिया और इसे मेसर्स जगतबंधु टी एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड (जेटीईपीएल) को बेचने की पेशकश की, जिसके दिलीप घोष निदेशक हैं।
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