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Supreme Court: 'सरकार ने जिम्मेदारी नहीं निभाई'; UP के स्कूल में मुस्लिम बच्चे को थप्पड़ विवाद पर बोली अदालत

Fri, 12 Jan 2024 10:11 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में स्कूली बच्चे को सहपाठियों से पिटवाने के मामले में सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि राज्य सरकार ने वह जिम्मेदारी नहीं निभाई है, जिसकी उससे अपेक्षा की जाती है। अदालत में दो जजों की खंडपीठ ने यह सख्त टिप्पणी की।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार की भूमिका पर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने अपेक्षित काम नहीं किया, जिसके कारण मुस्लिम छात्र को सहपाठियों के पिटवाने का अप्रिय घटना हुई। बता दें कि कुछ हफ्ते पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें शिक्षिका के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दूसरी कक्षा के बच्चे को थप्पड़ मारे गए। घटना की पड़ताल होने पर मामला खुब्बापुर गांव का निकला। शिक्षिका पर आरोप है कि उसके कहने पर कक्षा 2 के लड़के को सहपाठियों ने थप्पड़ जड़े। मामला तूल पकड़ने पर सांप्रदायिक टिप्पणी करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया।
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न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि मुजफ्फरनगर के स्कूल में जिस तरह से घटना हुई, उसके बारे में राज्य को चिंतित होना चाहिए था। पीठ ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी। पीठ ने कहा कि अदालत टीआईएसएस की सिफारिशों के कार्यान्वयन पर गौर करेगी। इसके बाद आरटीई के पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा।बता दें कि 10 नवंबर, 2023 को शीर्ष अदालत ने पीड़ित बच्चे की काउंसलिंग के लिए आदेश का पालन नहीं करने के लिए भी राज्य सरकार को फटकार लगाई थी।

अदालत ने मुजफ्फरनगर के स्कूल में मुस्लिम बच्चे को थप्पड़ मारे जाने की घटना पर कहा, 'यह सब इसलिए हुआ क्योंकि राज्य ने अपराध के बाद वह एक्शन नहीं लिया जो उससे अपेक्षित था। जिस तरह से घटना हुई, उसके बारे में राज्य को चिंतित होना चाहिए था। इसलिए, हमने शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून के कार्यान्वयन के संबंध में अन्य मुद्दे भी उठाए हैं। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 6 नवंबर, 2023 को राज्य सरकार से पीड़ित लड़के को एक निजी स्कूल में प्रवेश की सुविधा देने को कहा था।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। उन्होंने इस मामले की शीघ्र जांच की मांग की थी। याचिकाकर्ता तुषार गांधी की ओर वकील शादान फरासत से पैरवी की। अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि वह पीड़ित बच्चे और उसके सहपाठियों की काउंसलिंग के संबंध में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की सिफारिशों के कार्यान्वयन पर राज्य सरकार को जानकारी दें। 

शुक्रवार को संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गरिमा प्रसाद ने कहा कि राज्य के शिक्षा विभाग ने टीआईएसएस रिपोर्ट के कार्यान्वयन पर एक हलफनामा दायर किया है। पीड़ित बच्चे को अपने नए स्कूल में 28 किमी की यात्रा करनी होगी। उन्होंने कहा, फैसला बच्चे के परिवार को करना है। यह आरटीई अधिनियम के जनादेश के खिलाफ है। कानून में प्रावधान है कि कक्षा 1 से 5 तक के छात्र को 1 किमी के दायरे में शिक्षा मिलेगी, जबकि कक्षा 6 से 8 तक के छात्र तीन किमी के दायरे में पढ़ाई कर सकते हैं।

याचिकाकर्ता वकील फरासत ने हलफनामे को 'अपर्याप्त' बताया और कहा कि उन्हें इस पर विस्तृत जवाब दाखिल करने की जरूरत है। उन्होंने टीआईएसएस की सिफारिशों के कार्यान्वयन पर और अधिक जानकारी मांगी। अदालत ने फरासत से कहा कि पीड़िता के पिता से सलाह लेने के बाद राज्य सरकार को अपने सुझाव लिखित में दें ताकि सिफारिशों को लागू किया जा सके।

क्या है पूरा मामला? महिला शिक्षिका पर आरोप, शिक्षा विभाग ने नोटिस भेजा
बता दें कि मामला तूल पकड़ने के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। मुस्लिम लड़के के खिलाफ कथित तौर पर सांप्रदायिक टिप्पणी करने और उसके सहपाठियों को होमवर्क पूरा न करने पर उसे थप्पड़ मारने के मामले में महिला शिक्षिका को आरोपी बनाया गया था। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग ने भी स्कूल को नोटिस दिया था।
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