सैन्य उद्देश्यों के लिए चीन हिंद महासागर और अन्य महासगरों से जानकारी इकट्ठा कर रहा है। अमेरिकी थिंक टैंक की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि दुनिया के महासागरों का सर्वेक्षण करने के लिए चीन ने अनुसंधान पोतों को विकसित किया है। शुक्रवार को चीन ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है। चीन ने कहा कि हमारे जहाजों का संचालन समुद्र के कानूनों के तहत किए जाते हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि मुझे नहीं पता कि आपकी इस रिपोर्ट का क्या आधार है। मुझे समझ नहीं आया कि आप इस तरह के परिणामों पर क्यों पहुंच गए। उन्होंने अमेरिकी रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा कि चीनी पक्ष की वैज्ञानिक गतिविधियां पूरी तरह से यूएनसीएलओएस के तहत है। हम लगातार समुद्री और वैज्ञानिक क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने रिपोर्ट को लेकर कही यह बात
चीनी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी की रिपोर्ट ऐसे समय में आई जब मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के चीन दौरे पर थे। गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुइज्जू की पांच दिवसीय यात्रा के दौरान मालदीव और चीन ने 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए, इस दौरान उन्होंने अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ बातचीत की। भारत हिंद महासागर में चीनी जहाजों की बार-बार यात्राओं और श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह में डॉकिंग पर चिंता व्यक्त कर रहा है, जिसे चीन ने ऋण स्वैप के रूप में 99 साल के पट्टे पर हासिल किया था। श्रीलंका ने पिछले महीने अनुसंधान जहाजों पर एक साल की रोक लगा दी है, जिसको लेकर चीन खासा नाराज है। श्रीलंकाई मीडिया ने दावा किया कि चीन समर्थक नेता मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू ने चीन अनुसंधान जहाजों को मालदीव बंदरगाह में डॉक करने की अनुमति देने की योजना बनाई हैं।