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एससी-एसटी एक्ट: मौत की सजा के प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, जानें मामले पर अदालत ने क्या कहा

Tue, 13 Feb 2024 10:10 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मौत की सजा के प्रावधान को खत्म करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणि से कहा कि हमें बताएं कि क्या एससी और एसटी कानून के मृत्युदंड प्रावधान के तहत कोई मुकदमा चलाया गया है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि से कहा कि हमें बताएं कि क्या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के मृत्युदंड प्रावधान के तहत कोई मुकदमा चलाया गया है। अदालत वकील ऋषि मल्होत्रा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मौत की सजा के प्रावधान को खत्म करने की मांग की है।
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याचिकाकर्ता बोला- मेरे पास इससे जुटा डेटा नहीं
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कहा कि कुछ डेटा होना जरूरी है कि क्या इस प्रावधान के तहत अपराध हुए हैं। शीर्ष अदालत ने वकील से पूछा कि क्या इस प्रावधान के तहत दोषसिद्धि का एक भी उदाहरण है। जवाब में वकील ने कहा कि उनके पास इससे जुड़ा डेटा नहीं है। इसके बाद पीठ ने वेंकटरमणि से जानकारी देने और इस मुद्दे पर एक संक्षिप्त नोट प्रस्तुत करने को कहा। वकील ऋषि मल्होत्रा ने कहा कि मामला 2019 से लंबित है और भारत संघ द्वारा आज तक कोई प्रतिक्रिया दायर नहीं की गई है।

कोई एक उदाहरण जहां दोषसिद्धि हुई हो- कोर्ट
पीठ ने कहा,'क्या कोई एक भी उदाहरण है, जहां दोषसिद्धि हुई है। क्या कभी कोई दोषसिद्धि हुई है। क्या आप इस प्रावधान के तहत किसी अभियोजन का पता लगाने के लिए अपने कार्यालयों का उपयोग कर सकते हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3 (2) ऐसे मामले में अनिवार्य मौत की सजा का प्रावधान करती है, जहां अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के एक निर्दोष सदस्य को दोषी ठहराया जाता है और झूठे आरोप के चलते फांसी दी जाती है। 
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