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मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त: कहा- पीड़ितों को अंधेरे में न रखें, जांच एजेंसी को दिए ये निर्देश

Thu, 26 Feb 2026 05:55 PM IST
Himanshu Singh Chandel न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा मामलों में बड़ा आदेश देते हुए सीबीआई और राज्य एसआईटी को पीड़ितों और उनके परिवारों को चार्जशीट की प्रतियां देने को कहा है। अदालत ने मुफ्त कानूनी सहायता, यात्रा खर्च और सुरक्षित सुनवाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही जांच और पुनर्वास की निगरानी कर रही समितियों को मानदेय देने का आदेश भी दिया गया।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मणिपुर में 2023 में हुई जातीय हिंसा से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम और सख्त निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसियां पीड़ितों और उनके परिवारों को अंधेरे में नहीं रख सकतीं। इसलिए केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई और मणिपुर पुलिस की विशेष जांच टीमों को निर्देश दिया गया है कि जिन मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है, उसकी प्रतियां सीधे पीड़ितों और उनके परिवारों को उपलब्ध कराई जाएं। अदालत ने साफ किया कि न्याय प्रक्रिया में पीड़ितों की भागीदारी जरूरी है।

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सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश मणिपुर हिंसा मामलों की जांच की निगरानी कर रहे पूर्व महाराष्ट्र पुलिस प्रमुख दत्तात्रेय पडसलगीकर की 12वीं स्थिति रिपोर्ट देखने के बाद दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि सीबीआई अब तक 20 हिंसा मामलों में विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वहीं छह अन्य एफआईआर की जांच जारी है और अगले छह महीने में उन्हें पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जांच एजेंसियों को तय समय सीमा में बाकी मामलों की जांच पूरी करने के निर्देश भी दिए।

पीड़ितों को मिलेगा मुफ्त कानूनी सहारा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि कई पीड़ितों और उनके परिवारों को यह तक नहीं पता कि उनके मामलों में क्या कार्रवाई हुई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और असम राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को हर पीड़ित को मुफ्त कानूनी सहायता देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे वकील नियुक्त किए जाएं जो स्थानीय भाषा जानते हों ताकि पीड़ित आसानी से अपनी बात रख सकें। अदालत ने यह भी कहा कि इन वकीलों के गुवाहाटी आने-जाने और ठहरने का खर्च मणिपुर विधिक सेवा प्राधिकरण उठाएगा।
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गुवाहाटी में चलेगा ट्रायल, खर्च भी सरकार उठाएगी
सुप्रीम कोर्ट पहले ही सुरक्षा कारणों से मणिपुर से जुड़े कई मामलों की सुनवाई असम के गुवाहाटी में स्थानांतरित कर चुका है। अदालत ने निर्देश दिया कि केस की सुनवाई में शामिल होने के लिए पीड़ित या उनके परिवार का एक सदस्य यात्रा और रहने की सुविधा का लाभ ले सकेगा और इसका खर्च भी संबंधित प्राधिकरण वहन करेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानूनी सहायता वकील जरूरत पड़ने पर सरकारी वकीलों के साथ या स्वतंत्र रूप से विशेष अदालत की मदद कर सकेंगे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बयान देने की सुविधा जारी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने चार्जशीट की सामग्री पर कोई टिप्पणी नहीं की है और पीड़ितों को विशेष अदालत में अपनी सभी शिकायतें उठाने की पूरी स्वतंत्रता होगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अदालत ने पहले दिया गया आदेश भी बरकरार रखा, जिसके तहत पीड़ित गुवाहाटी की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान दर्ज करा सकते हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह जानकर नाराजगी जताई कि पीड़ितों के पुनर्वास की निगरानी कर रही जस्टिस गीता मित्तल समिति और जांच की निगरानी कर रहे अधिकारियों को अब तक कोई मानदेय नहीं दिया गया।

निगरानी समिति और अधिकारियों को भुगतान का आदेश
अदालत ने अंतरिम व्यवस्था के तहत जस्टिस गीता मित्तल को 12 लाख रुपये और समिति की अन्य सदस्य पूर्व न्यायाधीश शालिनी पी जोशी तथा आशा मेनन को 10-10 लाख रुपये देने का आदेश दिया। साथ ही केंद्र सरकार को दत्तात्रेय पडसलगीकर को भी फिलहाल 10 लाख रुपये देने को कहा गया। अदालत ने कहा कि आगे चलकर मानदेय की अंतिम राशि तय की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में होगी। गौरतलब है कि 3 मई 2023 को शुरू हुई मणिपुर हिंसा में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई, सैकड़ों घायल हुए और हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए थे।

 केंद्र सरकार ने किया नए अध्यक्ष का नियुक्ति आदेश जारी
मणिपुर हिंसा की जांच कर रहे आयोग के नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस बलबीर सिंह चौहान को जांच आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति जस्टिस अजय लांबा के इस्तीफे के बाद की गई है, जो 28 फरवरी से प्रभावी होगा। गृह मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार जस्टिस चौहान 1 मार्च से आयोग की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह आयोग जून 2023 में केंद्र सरकार द्वारा गठित किया गया था।
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हिंसा की घटनाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारी की होगी जांच
जांच आयोग मणिपुर में हुई जातीय हिंसा की पूरी घटनाक्रम की पड़ताल कर रहा है। आयोग यह भी जांच करेगा कि हिंसा रोकने में किसी अधिकारी या संस्था की लापरवाही तो नहीं हुई और प्रशासनिक कदम पर्याप्त थे या नहीं। 3 मई 2023 को ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च के बाद शुरू हुई हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। आयोग लोगों और संगठनों से मिली शिकायतों की भी जांच कर रहा है।


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