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Railways: स्टार्टअप-इनोवेटर्स इस प्लेटफॉर्म पर 24x7 दे सकेंगे रेलवे को आइडिया, क्लेम पॉलिसी पर आया ये अपडेट

Thu, 26 Feb 2026 05:51 PM IST
Rahul Kumar डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रेल मंत्रालय ने 52 हफ्ते, 52 रिफॉर्म के तहत गुरुवार को तीसरे और चौथे सुधार की घोषणा की है। इसके तहत नई रेल टेक पॉलिसी लागू की गई है और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल को पूरी तरह डिजिटल बनाने का एलान किया गया है।
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रेलवे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय रेलवे अब सिर्फ ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कामकाज के तरीके में बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसी दिशा में 52 हफ्ते, 52 रिफॉर्म अभियान चलाया जा रहा है। गुरुवार को रेल मंत्रालय ने तीसरे और चौथे सुधार की घोषणा की। इसके तहत नई रेल टेक पॉलिसी लागू की गई है और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल को पूरी तरह डिजिटल बनाने का ऐलान किया गया है।

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नई रेल टेक पॉलिसी क्या है?
तीसरे सुधार के तहत नई रेल टेक पॉलिसी लाई गई है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप और नए इनोवेटर्स को रेलवे की समस्याओं के समाधान में शामिल करना है। इसके लिए एक विशेष रेल टेक पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल पर इनोवेटर एक ही चरण में अपना पूरा प्रस्ताव ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। चयन प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। पहले के मुकाबले आर्थिक सहायता भी बढ़ा दी गई है, ताकि अच्छे आइडिया तेजी से आगे बढ़ सकें। रेल टेक की पहल हमेशा खुली रहेगी। इसे सामान्य टेंडर प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा। इससे नई तकनीक पर जल्दी प्रयोग और उसे तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया, इस पहल में सबसे पहली प्राथमिकता सुरक्षा को दी जाएगी। इसके बाद मेंटेनेंस व्यवस्था में सुधार और कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान पर ध्यान दिया जाएगा।

रेल मंत्री ने कई इनोवेशन चैलेंज भी गिनाए, जिनमें स्टार्टअप तुरंत भाग ले सकते हैं।

  • -हाथियों के ट्रैक पर आने की पहचान करने वाला एआई सिस्टम
  • -कोच में आग की पहचान के लिए एआई आधारित फायर डिटेक्शन सिस्टम
  • - ड्रोन से टूटी रेल लाइन की जांच
  • - पटरियों पर दबाव (स्ट्रेस) मॉनिटरिंग तकनीक
  • - पार्सल वैन में सेंसर से वजन मापने की मशीन
  • - डिब्बों पर सोलर पैनल लगाने की योजना
  • - कोहरे में रुकावट पहचानने की तकनीक
  • - एआई के जरिए पेंशन और विवाद समाधान प्रणाली

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रेलवे की इस नई व्यवस्था में स्केल अप ग्रांट तीन गुना से ज्यादा बढ़ा दी गई है। प्रोटोटाइप बनाने और उसकी टेस्टिंग के लिए मिलने वाली अधिकतम राशि अब दोगुनी होगी। रेलवे स्वीकृत स्टार्टअप लागत का 50 प्रतिशत तक खर्च वहन करेगा। बाकी राशि संबंधित विभाग अपने बजट से देंगे। उदाहरण के लिए, ट्रैक से जुड़े समाधान के लिए ट्रैक मेंटेनेंस फंड और सुरक्षा से जुड़े नवाचार के लिए सेफ्टी बजट का उपयोग किया जाएगा।

अब आसान होगी मुआवजा प्रक्रिया
चौथा सुधार रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल (आरसीटी) को आधुनिक और डिजिटल बनाने से जुड़ा है। देशभर में मौजूद आरसीटी की सभी 23 बेंच को डिजिटल रूप से जोड़ा जाएगा। अब कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से से, 24 घंटे और सातों दिन ऑनलाइन केस दाखिल कर सकेगा। रेलवे का मानना है कि इससे प्रक्रिया तेज, सरल और पारदर्शी बनेगी। यह नया प्लेटफॉर्म उन लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, जो रेल हादसों, अनहोनी घटनाओं, सामान के नुकसान या किराया विवाद के मामलों में मुआवजा मांगते हैं।

- मानसिक आघात (मेंटल ट्रॉमा) के मामलों पर कमेटी फैसला करेगी

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- देश के किसी भी हिस्से से ऑनलाइन क्लेम फाइल और ट्रैक किया जा सकेगा
- अधिकतम छह महीने में फैसला देने का लक्ष्य
- जांच की जिम्मेदारी जीआरपी 

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