कई ऐसे मौके आते हैं जब सुप्रीम कोर्ट में छुट्टियों के दिन भी काम होता है। भले ही ऐसे मामले दुर्लभ हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल सिटिंग के बारे में जानना बेहद दिलचस्प है। ऐसे मौकों के बारे में जानिए जब शीर्ष अदालत में छुट्टी के दिन भी बेंच बैठी और मुकदमों की सुनवाई हुई।
सुप्रीम कोर्ट में कई बार छुट्टी के दिन भी सुनवाई होती है। गैर-कार्य दिवस यानी ऐसे दिन जब अदालत में परंपरागत रूप से अवकाश होता है। हालांकि, शीर्ष अदालत में कई ऐसे मौके आए हैं जब इन दिनों में भी अदालत की खास पीठ में मुकदमों की सुनवाई की गई है। शीर्ष अदालत में गैर कार्य दिवसों में हुई सुनवाई और यानी कोर्ट की स्पेशल सिटिंग के बारे में जानना काफी रोचक है। आइए समझें ऐसे दुर्लभ मामले कब और क्यों आए?
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शनिवार को क्यों करनी पड़ी सुनवाई
उच्चतम न्यायालय में शनिवार एक विशेष मामले की सुनवाई हुई। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ के आदेश पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने गैर-कार्यदिवस यानी छुट्टी के दिन भी सुनवाई का फैसला लिया। इस मामले से मेडिकल छात्रों का भविष्य जुड़ा है। पश्चिम बंगाल के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एमबीबीएस छात्रों के प्रवेश में कथित अनियमितता के मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने दो जजों की बेंच में पारित आदेश को अवैध करार दिया था। छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले की सुनवाई के लिए अहम फैसला लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने छुट्टी के दिन भी पीठ गठित करने का फैसला लिया और शनिवार को सुनवाई की।
सीजेआई चंद्रचूड़ की संविधान पीठ में हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ में कोलकाता हाईकोर्ट वाले मामले की सुनवाई हुई। सीजेआई चंद्रचूड़ के अलावा इस पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस भी शामिल हैं। पांच न्यायाधीशों की इस पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में लंबित मामलों पर आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार और मूल याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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तीस्ता सीतलवाड़ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं, गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिली
तीस्ता सीतलवाड़
शनिवार को हुई सुनवाई से पहले भी कई अवसर आए हैं जब गैर-कार्यदिवस में भी सुप्रीम कोर्ट की पीठ को सुनवाई करनी पड़ी है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, राज्यों में राजनीतिक संकट और दिल्ली समेत आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-NCR) में प्रदूषण जैसे अहम मुद्दों पर गैर-कार्य दिवस के दौरान सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष पीठों का गठन किया था। पिछले साल 1 जुलाई को, सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गोधरा कांड से जुड़ी महिला आरोपी की याचिका पर सुनवाई के लिए एक के बाद एक दो अलग-अलग पीठों का गठन किया।
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड पर निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर सबूत गढ़ने के आरोप हैं। इस मामले में तीस्ता ने सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा की मांग की थी। शनिवार देर रात हुई इस विशेष सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ गठित की गई थी। सीतलवाड को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देने पर दो न्यायाधीशों की अवकाश पीठ में मतभेद रहा था। इस कारण तीन न्यायाधीशों की पीठ गठित कर मामले की विशेष सुनवाई हुई। अदालत ने साफ किया था कि सामान्य अपराधी भी किसी न किसी रूप में अंतरिम राहत का हकदार है।
हाईकोर्ट के आदेश पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील, विशेष पीठ में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
बलात्कार पीड़िता के मामले में भी विशेष पीठ का गठन
स्पेशल सिटिंग के ऐसे ही दुर्लभ प्रकरण में 2023 में शीर्ष अदालत ने स्वत: संज्ञान लिया था। शनिवार को हुई इस सुनवाई में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई गई थी। इसमें लखनऊ विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रमुख को यह तय करने के लिए कहा गया था कि कथित बलात्कार पीड़ित महिला 'मांगलिक' है या नहीं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा मामले में भी स्पेशल सिटिंग
गैर-कार्यदिवस पर सुनवाई के एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एमआर शाह (सेवानिवृत्त) और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की विशेष पीठ गठित की गई थी। माओवादी लिंक मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को आरोप मुक्त करने की अपील की गई थी। बॉम्बे उच्च न्यायालय के फैसले को निरस्त करने के लिए कोर्ट ने शनिवार, 15 अक्टूबर, 2022 को सुनवाई की थी।
शनिवार के अलावा रविवार को भी हुई मुकदमों की सुनवाई
पूर्व सीजेआई एनवी रमना (फाइल)
- फोटो : ANI
सीजेआई एनवी रमना के कार्यकाल में भी स्पेशल सिटिंग
साल 2021 में भी सुप्रीम कोर्ट में गैर-कार्यदिवस पर मुकदमे की सुनवाई हुई। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता में विशेष पीठ का गठन हुआ। राजधानी में वायु गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए 13 नवंबर, 2021 (शनिवार) को हुई इस सुनवाई में शीर्ष अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को 'आपातकालीन उपाय' करने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन के लॉकडाउन का प्रस्ताव भी रखा था।
महाराष्ट्र के संवैधानिक संकट पर रविवार को हुई सुनवाई
शनिवार के अलावा शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों ने रविवार को भी मुकदमों की सुनवाई की है। 24 नवंबर, 2019 का दिन रविवार था। इस दिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा नेता देवेंद्र फड़णवीस के शपथ ग्रहण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई थी। कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और शिवसेना ने याचिका दायर कर महाराष्ट्र में संवैधानिक संकट की दुहाई देते हुए तत्काल सुनवाई की अपील की। इस मामले में तीन न्यायाधीशों की पीठ में सुनवाई हुई थी।
पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई और पत्रकार विनोद दुआ का मामला
जस्टिस रंजन गोगोई (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
सीजेआई रंजन गोगोई के खिलाफ आरोपों पर सुनवाई
एक अन्य दुर्लभ मामले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने भी स्पेशल सिटिंग का फैसला लिया था। अपने खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों वाले इस अप्रत्याशित मामले को बड़ी साजिश का हिस्सा माना गया। 20 अप्रैल, 2019 को तत्कालीन सीजेआई गोगोई ने विशेष पीठ में इस मामले की सुनवाई की। शीर्ष अदालत की ही एक पूर्व कर्मचारी ने सीजेआई पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। कुछ समाचार पोर्टल पर प्रकाशन के बाद इस मामले की सुनवाई काफी चर्चित भी रही थी।
दिवंगत पत्रकार विनोद दुआ का मामला रविवार को सुना गया
सीजेआई गोगोई वाले मामले को शीर्ष अदालत ने 'न्यायपालिका की स्वतंत्रता के मद्देनजर सार्वजनिक महत्व का अहम मामला' माना था। एक अन्य अहम घटनाक्रम 2020 में सामने आया था। शीर्ष अदालत ने रविवार के दिन दिवंगत पत्रकार विनोद दुआ की याचिका पर सुनवाई की थी। उन्होंने अपने खिलाफ देशद्रोह के मामले को रद्द करने की मांग की थी।