सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की पटाखा फैक्ट्री में पिछले साल हुए विस्फोट में मारे गए पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा देने के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश को पलट दिया है। एनजीटी ने पिछले साल ही अपने आदेश में कहा था कि विरुधुनगर जिले की पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके के मामले में मृतकों के परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एएम खानविल्कर और दिनेश माहेश्वरी की बेंच ने एनजीटी को निर्देश दिया कि उसने मामले में सिर्फ एक हिस्से को ध्यान में रखकर मुआवजे को लेकर फैसला सुनाया। इसलिए ट्रिब्यूनल को इस मामले में फिर से विचार करने की जरूरत है।
बेंच ने कहा, "न्याय के लिए हम आक्षेपित निर्णय और आदेश को निरस्त करना ठीक समझते हैं और इस मामले में आमने-सामने रहे पक्षों को फिर से एनजीटी के समक्ष भेजते हैं, ताकि मामले पर नई तरह से सुनवाई शुरू हो सके। यह दोनों ही पक्षों के लिए अहम मौका है।"
शीर्ष अदालत के समक्ष वकील के माध्यम से पेश होने वाले पक्षों को 14 फरवरी, 2022 को अधिकरण के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है, और एनजीटी को उस दिन मामले पर आगे बढ़ने या सुविधानुसान सुनवाई के लिए उपयुक्त तिथि निर्धारित करने का निर्देश दिया गया।
एनजीटी ने 11 जून 2021 को पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में पीड़ितों को मुआवजा देने का फैसला सुनाया था। एनजीटी के आदेश को चुनौती देते हुए तमिलनाडु फायरवर्क्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने अपील की थी। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और एनडीटी के आदेश को पलट दिया।