सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के नियम 11 (सी) और 22 (सी) को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और मुख्य चुनाव आयुक्त को नोटिस जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। इसके तहत चुनाव आयोग हर उम्मीदवार को मतदाता सूची की दो प्रतियां देने के लिए बाध्य है। दो अधिवक्ताओं द्वारा दायर जनहित याचिका में भारी खर्च के साथ-साथ बड़ी मात्रा में कागज के उपयोग को बचाने के लिए एक विकल्प की मांग की गई है। इसमें आरोप लगाया कि देश को मतदाता सूची को छापने और चुनाव लड़ने वाले मान्यता प्राप्त दलों के उम्मीदवारों को मुफ्त में आपूर्ति करने के लिए लगभग 47.84 करोड़ रुपये का खर्च वहन करना पड़ा। इससे देश को काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है।
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चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस
मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के नियम 11 (सी) और 22 (सी) को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और मुख्य चुनाव आयुक्त को नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया कि इन नियमों के संदर्भ में, चुनाव आयोग प्रत्येक चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को मतदाता सूची की दो प्रतियों की आपूर्ति करने के लिए बाध्य है जिससे खर्च का बोझ बढ़ जाता है। पिछले चुनावों में चुनाव आयोग द्वारा 47,84,38,000 रुपये खर्च किए गए थे। इसलिए इन नियमों की वैधता के रूप में चुनौती उठाई जाती है और यह अन्य बातों के साथ प्रस्तुत किया जाता है कि एक विकल्प तैयार किया जाए ताकि भारी खर्च के साथ-साथ बड़ी मात्रा में कागज के उपयोग को बचाया जा सके।