सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह दस दिन में बताए कि लोकपाल की नियुक्ति कब करेगी। शीर्ष अदालत ने तल्खी दिखाते हुए पूछा कि देश में आखिर कब तक लोकपाल की नियुक्ति टलती रहेगी।
न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने केंद्र सरकार को हलफनामा देकर लोकपाल की नियुक्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी मांगी है।
सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने लिखित निर्देश पीठ को सौंपा। इस मामने की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी। कॉमन कॉज नामक संगठन ने अपनी याचिका में कहा है कि गत वर्ष अप्रैल में शीर्ष अदालत के आदेश के बावजूद अब तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो सकी है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने कहा कि सरकार जानबूझ कर लोकपाल की नियुक्ति टाल रही है। अब वह वक्त आ गया है जब लोकपाल की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
मालूम हो कि मई में सरकार ने बताया था कि लोकपाल की नियुक्ति करने वाली चयन समिति में नामचीन हस्ती के तौर पर वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी को नियुक्त किया गया है। वरिष्ठ वकील पीपी राव के निधन के बाद यह पद खाली था।
लोकपाल की नियुक्ति पर सरकार की नीयत साफ नहीं : कांग्रेस
कांग्रेस ने लोकपाल की नियुक्ति पर मोदी सरकार को घेरा है। पार्टी प्रवक्ता डा. अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने लोकायुक्त नहीं बनने दिया। अब केंद्र में उनकी सरकार का आखिरी साल चल रहा है। ऐसे में लोकपाल को लेकर भी उनकी नीयत साफ नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लोकपाल नियुक्त किए जाने पर भरोसा जताया, लेकिन सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के समय नियुक्ति की जाएगी।