पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट को मुख्य सचिव की पेशी का आदेश पारित करने की जरूरत नहीं थी। दरअसल, यूपी सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई का आग्रह किया।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में 392 अस्थायी लिपिकों को नियमित करने के वर्षों पुराने मामले में मुख्य सचिव और इंस्पेक्टर जनरल (पंजीकरण) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है।
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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने शुक्रवार को हाईकोर्ट के 10 नवंबर के आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। प्रतिवादियों को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।
पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट को मुख्य सचिव की पेशी का आदेश पारित करने की जरूरत नहीं थी। दरअसल, यूपी सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई का आग्रह किया। इसके बाद पीठ ने दोपहर 12.45 बजे सुनवाई करने पर सहमति जताई।
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तीन अधिकारियों की समिति ने की थी जांच
सुनवाई में एएसजी भाटी ने बताया कि वर्ष 2004 में दाखिल एक विशेष अपील पर वर्ष 2017 में हाईकोर्ट ने इस मामले में तीन अधिकारियों की एक समिति बनाकर जांच करने का आदेश दिया था। जांच समिति ने पाया था कि नियमितीकरण की प्रक्रिया में कोई भी अनियमितता नहीं है और इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं पाया गया।