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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द करने की शक्ति का प्रयोग कम से कम होना चाहिए

Sat, 19 Feb 2022 03:49 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुछ विशेष श्रेणी के मामलों को निर्दिष्ट किया गया है जिसमें कार्यवाही को रद्द करने के लिए इस शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है।
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को कहा कि आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द करने की शक्ति का प्रयोग कम से कम और संयम के साथ किया जाना चाहिए। इसका इस्तेमाल दुर्लभतम मामलों में ही किया जाना चाहिए। न्यायाधीश बीआर गवई और एस रवींद्र भट्ट की पीठ ने यह टिप्पणी एक संपत्ति के विवाद में तीन व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी और बेईमानी के एक मामले को रद्द करते हुए की।

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पीठ ने कहा, 'इस अदालत ने आगाह किया है कि, आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की शक्ति का प्रयोग बहुत कम और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए और वह भी दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में। अदालत ने कुछ विशेष श्रेणी के मामलों को निर्दिष्ट किया है जिसमें कार्यवाही को रद्द करने के लिए ऐसी शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है।'

शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन श्रेणियों में इस शक्ति का उपयोग किया जा सकता है, उनमें से एक यह है कि कोई आपराधिक कार्यवाही प्रकट रूप से दुर्भावनापूर्ण रूप से आरोपी से प्रतिशोध लेने के लिए और निजी द्वेष के कारण उसे उकसाने की दृष्टि से की गई हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में आरोपी के खिलाफ शिकायत अपीलकर्ता को परेशान करने के मकसद से दर्ज कराई गई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) की धारा 156 (3) के तहत आदेश पारित करते हुए सर्वोच्च न्यायालय की ओर से बनाए गए कानूनों पर विचार करने में पूरी तरह असफल रहे। सीआरपीसी की इस धारा के तहत शक्ति का प्रयोग मजिस्ट्रेट की ओर से पुलिस को केवल एक संज्ञेय अपराध के संबंध में जांच करने का निर्देश देने के लिए किया जा सकता है।

पीठ ने कहा, 'किसी भी मामले में, जब शिकायत एक हलफनामे द्वारा समर्थित नहीं थी, तो मजिस्ट्रेट को सीआरपीसी की धारा 156 के तहत आवेदन पर विचार नहीं करना चाहिए था। इसलिए, हमारा विचार है कि वर्तमान कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग के अलावा और कुछ नहीं होगा।'

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मतदाताओं को मुफ्त तोहफे बांटने वाली पार्टियों पर मामला दर्ज करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए मुफ्त तोहफे बांटने वाली राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई। हिंदू सेना के उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह यादव ने याचिका में कहा, उन्हें कांग्रेस, सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी की ओर से कई लुभावने तोहफों के आफर हुए हैं। ऐसे में मैं मांग करता हूं कि इस तरह की प्रथा को भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी घोषित किया जाए और इन पार्टियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए। उन्होंने कहा, निष्पक्ष मतदान के लिए ऐसा करना जरूरी है। 
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