सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण नीति की आलोचना करने वालों पर दर्ज एफआईआर को रद्द किए जाने की मांग वाली अर्जी पर याचिकाकर्ता से इस बारे में ब्योरा मांगा है। शीर्ष अदालत ने कहा, कम से आप एफआईआर और इससे जुड़ा ब्योरा तो लेकर आएं, ताकि इस मामले में आपकी याचिका पर आगे सुनवाई की जा सके।
याचिकाकर्ता को प्राथमिकी का ब्योरा पेश करने के लिए दिया एक सप्ताह का वक्त
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने याचिकाकर्ता वकील प्रदीप कुमार यादव को केंद्र सरकार के टीकाकरण अभियान के बारे में आलोचनात्मक विज्ञापन, पोस्टर और पुस्तिका जारी करने वाले 24 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और विवरण को एक हफ्ते में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
यादव ने अपनी याचिका में कोर्ट से इन एफआईआर रद्द करने के लिए फौरन दिशा-निर्देश दिए जाने की मांग की है। पीठ ने कहा, हम पुलिस को केंद्र की टीकाकरण नीति की आलोचना करने वाले पोस्टर चिपकाने पर प्राथमिकी दर्ज नहीं करने के लिए आदेश नहीं दे सकते।
पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, आपको महज अखबारों की खबरों पर भरोसा करने के बजाय अपना होमवर्क करना चाहिए था। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और लक्षद्वीप में टीकाकरण नीति की निंदा करने वालों पर मामले दर्ज किए गए हैं और पुलिस को उन्हें प्राथमिकी की प्रति देने का निर्देश दिया जा सकता है।