एनसीडीआरसी के आदेश के खिलाफ याचिका पर दिया फैसला
अपने हालिया आदेश में अदालत ने कहा, 'बीमा करवाने वाले की चिकित्सकीय स्थिति का आकलन करने के बाद जब एक बार पॉलिसी जारी कर दी जाती है, बीमा कंपनी किसी वर्तमान चिकित्सकीय स्थिति का हवाला देकर दावा देने से इनकार नहीं कर सकती है, जिसका उल्लेख बीमा करवाने वाले ने प्रस्ताव फॉर्म में किया है।' अदालत राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के एक आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
यह याचिका मनमोहन नंदा ने एनसीआरडीसी के उस आदेश के खिलाफ दायर की है जिसमें इसने अमेरिका में इलाज में आए खर्च के लिए दावे की मांग करने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। नंदा को अमेरिका की यात्रा करनी थी इसलिए उन्होंने एक ओवरसीज मेडिक्लेम बिजनेस और हॉलिडे पॉलिसी खरीदी थी। सैन फ्रांसिस्को पहुंचने पर उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा जहां उनकी एंजियोप्लास्टी हुई।
इसके साथ ही उनके हृदय की धमनियों से अवरोध को हटाने के लिए तीन स्टेंट भी डाले गए थे। इसके बाद नंदा ने बीमा कंपनी से इलाज में आए खर्च के लिए दावा किया। लेकिन, बीमा कंपनी ने यह कहते हुए उनके मेडिक्लेम को खारिज कर दिया कि नंदा का हाइपरलिपिडिमिया और मधुमेह का इतिहास था, जिसकी जानकारी उन्होंने बीमा पॉलिसी खरीदते समय नहीं दी था। बीमा कंपनी के इस कदम को मनमोहन नंदा ने एनसीआरडीसी में चुनौती दी थी।
बीमा के दावे को खारिज किया जाना कानून के अनुसार नहीं था
एनसीआरडीसी ने अपने फैसले में कहा था कि नंदा स्टैटिन दवाओं का सेवन कर रहे थे, जिसकी जानकारी उन्होंने पॉलिसी खरीदते समय नहीं दी थी। ऐसे में वह अपनी स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जानकारी देने के अपने कर्तव्य का पालन करने में असफल रहे थे। वहीं, शीर्ष अदालत ने मनमोहन नंदा की याचिका पर अपने फैसले में कहा कि यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की ओर से पॉलिसी को खारिज किया जाना अवैध था और कानून के मुताबिक नहीं था।
पीठ ने कहा कि मेडिक्लेम पॉलिसी को खरीदने का उद्देश्य अचानक बीमारी या बीमारी के संबंध में क्षतिपूर्ति की मांग करना है जो अपेक्षित नहीं है और विदेशों में भी हो सकती है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा, 'अगर बीमा करवाने वाला व्यक्ति ऐसी किसी बीमारी से अचानक ग्रसित हो जाता है, जिसे पॉलिसी के तहत स्पष्ट रूप से बाहर नहीं रखा गया है तो दावा करने वाले व्यक्ति को उसके खर्चों के लिए क्षतिपूर्ति देना बीमा कंपनी का कर्तव्य है।'