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Supreme Court: 'नदी तटों पर प्लास्टिक डंपिंग से पर्यावरण को गंभीर नुकसान'; कोर्ट ने अधिकारियों को दी नसीहत

Tue, 06 Aug 2024 08:22 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गंभीर टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही पीठ ने अपने पहले के आदेश को भी साफ किया।  
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने नदी के तटों पर प्लास्टिक डंपिग पर गंभीर चिंता जाहिर की है। शीर्ष कोर्ट ने इसे लेकर मंगलवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। साथ ही देश में नदी तटों और जल  में रहने वाले जीव-जंतुओं पर भी असर पड़ रहा है। न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को लोगों के सहयोग से सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है।

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पीठ ने कहा कि प्लास्टिक की डंपिंग से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है और देश में नदी तटों और जल निकायों में जलीय जीवन पर भी असर पड़ रहा है। जब तक लोगों के सहयोग से जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ठोस प्रयास नहीं किया जाता है, तब तक अवैध/अनधिकृत निर्माणों को निशाना बनाने के प्रयासों के बावजूद देश में गंगा नदी/अन्य सभी नदियों और जल निकायों में पानी की गुणवत्ता में वांछित सुधार भ्रामक रहेगा।

गंभीर टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही पीठ ने अपने पहले के आदेश को भी साफ किया। उस आदेश में पीठ ने बिहार सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि गंगा नदी के किनारे, खासकर पटना शहर और उसके आसपास कोई अवैध निर्माण या अनधिकृत अतिक्रमण न हो।
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बता दें कि शीर्ष अदालत एनजीटी के 30 जून, 2020 के आदेश के खिलाफ पटना के रहने वाले अशोक कुमार सिन्हा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में पर्यावरण और कछारीय मैदान में अवैध निर्माण और स्थायी अतिक्रमण के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

याचिका में दावा किया गया था कि ट्रिब्यूनल ने याची द्वारा दिए गए पटना में गंगा के कछारीय मैदानों पर अतिक्रमण करने वाले लोगों के विस्तृत विवरण की जांच किए बिना आदेश पारित किया था। इसमें यह भी कहा गया था कि गंगा के कछारीय क्षेत्र पर अवैध और अनधिकृत निर्माण और स्थायी अतिक्रमण भारी मात्रा में अपशिष्ट, और सीवेज उत्पन्न कर रहे हैं। 

वकील आकाश वशिष्ठ ने कहा कि अवैध निर्माण आसपास रहने वाले निवासियों के जीवन और संपत्ति के लिए खतरा बढ़ा रहे हैं क्योंकि ये क्षेत्र हर साल बाढ़ के पानी में डूब जाते हैं। अवैध निर्माण नदी के प्राकृतिक मार्ग में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये अतिक्रमण और अवैध निर्माण समृद्ध जैव विविधता पर भी हानिकारक पर्यावरणीय प्रभाव डालने के साथ ही विलुप्त होती प्रजाति डॉल्फ़िन के आवास को भी नष्ट कर रहे हैं।

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