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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कुछ अलग सोचें, छुट्टियों में भी करें काम, इलाहाबाद हाईकोर्ट की खिंचाई

Tue, 26 Jul 2022 05:35 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने सोमवार को नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, वह अतिरिक्त बोझ संभालने के लिए तैयार है। यदि हाईकोर्ट को इन मामलों को संभालना मुश्किल लग रहा है, तो वह इन्हें सुप्रीम कोर्ट भेज दे। पीठ ने पाया, 853 आपराधिक अपीलें लंबित हैं।
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सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने दोषी कैदियों की जमानत याचिकाओं की सुनवाई में लंबी देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट को फटकार लगाई है। शीर्ष कोर्ट ने कहा, आपको कुछ हटकर सोचना चाहिए। इन मामलों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित करने के लिए छुट्टियों के दिन भी काम करना चाहिए।

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जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने सोमवार को नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, वह अतिरिक्त बोझ संभालने के लिए तैयार है। यदि हाईकोर्ट को इन मामलों को संभालना मुश्किल लग रहा है, तो वह इन्हें सुप्रीम कोर्ट भेज दे। पीठ ने पाया, 853 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। इनके याचिकाकर्ता 10 साल से अधिक जेल में गुजार चुके हैं। पीठ ने कहा, हम व्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ समझौता कर रहे हैं। हम आपको कई बार कह चुके हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 17 अगस्त को होगी। 

853 मामलों की जानकारी तलब
पीठ ने यूपी सरकार को आदेश दिया कि 853 मामलों की सूची नंबरों के साथ उसके समक्ष पेश की जाए। इसमें दोषी कैदी की हिरासत अवधि और इन मामलों में से किस आधार पर, कितनों की जमानत का सरकार ने विरोध किया है, इसकी भी जानकारी दी जाए। पीठ ने सरकार को दो हफ्ते की मोहलत दी है।
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दस साल से अधिक कैद बंदियों पर रिपोर्ट, 62 याचिकाओं का निपटारा बाकी
शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के वरिष्ठ रजिस्ट्रार की ओर से 15 साल से अधिक और 10 से 14 साल के बीच बंदी लोगों के संदर्भ में दाखिल रिपोर्ट देखी। पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है, 62 जमानत याचिकाओं का निपटारा अभी बाकी है। अगले दो-तीन हफ्ते में ये सूचीबद्ध हो सकती है। इस साल 22 अप्रैल से 17 जुलाई की अवधि के दौरान 232 नई जमानत याचिकाएं दाखिल की गई।

संतान पैदा करने के लिए पैरोल के खिलाफ अगले हफ्ते सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट उम्रकैद के दोषी को संतान पैदा करने के लिए पैरोल देने वाले राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने को तैयार हो गया। सीजेआई एनवी रमण की पीठ ने याचिका को अगले हफ्ते सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। पीठ को एक वकील ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पैरोल मांगने वालों की बाढ़ आ गई है।

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