सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक न्यायाधीश को संदेह से ऊपर होना चाहिए, क्योंकि आदेश पारित करने की आड़ में एक वादी को अनुचित लाभ पहुंचाना न्यायिक बेईमानी और कदाचार का सबसे खराब उदाहरण है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को भूमि अधिग्रहण मामलों में अपने आदेशों के लिए पूर्व न्यायाधीश के पेंशन लाभ में कटौती के दंड को बरकरार रखा।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने पूर्व अतिरिक्त जिला जज मुजफ्फर हुसैन की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। हुसैन उस समय आगरा में पदस्थापित थे और उन पर भूमि अधिग्रहण मामले में वादी को अधिक मुआवजा राशि देने के लिए आदेश जारी करने का आरोप है।
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर, 2006 को पेंशन लाभ में 90 फीसदी कटौती का फैसला सुनाया था। बाद में हाईकोर्ट ने हुसैन की याचिका पर सुनवाई के बाद पाया कि कुछ मामलों में दंड अवहनीय है।
लोक सेवक जल में मछली की तरह
पीठ ने कहा, यह अक्सर कहा जाता है कि लोक सेवक जल में मछली की तरह है, कोई यह नहीं कह सकता है कि मछली ने कब और कैसे पानी पिया। हुसैन पर आरोप है कि उन्होंने 23 मई, 2001 से 19 मई, 2003 तक भूमि अधिग्रहण के मामलों पर सुनवाई करते हुए जमीन के सौदे में निवेश से कई गुना अधिक मुआवजा दिलवाया।
साथियों को परेशान कर रहे बुजुर्ग दंपती को छोड़ना होगा वृद्धाश्रम
सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के एक वृद्धाश्रम में साथियों को परेशान करने वाले बुजुर्ग दंपती को वहां से निकालने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा, बुजुर्ग दंपती को वृद्धाश्रम में आनंद से रहने के लिए वहां के एक कमरे पर हक जताने की छूट है लेकिन संपत्ति में कोई दिलचस्पी दिखाए बिना।
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन ने शुक्रवार को कहा, वृद्धाश्रम में रहने वाले सभी बुजुर्गों के पास वहां रहने का लाइसेंस होता है लेकिन उनसे उम्मीद की जाती है कि वह एक निमभन स्तर पर अनुशासन का पालन भी करें। आपस में अच्छा व्यवहार करें। उन्हें अपने दूसरे साथियों को परेशान नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे भी बुजुर्ग हैं।
पीठ ने कहा, वृद्धाश्रम के प्रबंधन के पास लोगों को परेशान करने और व्यवधान पैदा करने वाले बुजुर्गों का लाइसेंस रद्द करने और उनसे कमरा छोड़ने के लिए कहने का अधिकार है। पीठ समर्पण वरिष्ठ जन परिसर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें व्यवधान करने वाले बुजुर्ग दंपती को वहां से हटाने के फैसले को वापस लेने को कहा गया था।