महामारी के बाद आर्थिक और कारोबारी गतिविधियों में तेजी से शहरी बेरोजगारी दर में 1.6 फीसदी की गिरावट आई है। शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर अक्तूबर-दिसंबर, 2021 में घटकर 8.7 फीसदी रह गई। यह आंकड़ा इससे एक साल पहले की समान अवधि में 10.3 फीसदी रहा था।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई-सितंबर, 2021 के दौरान शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 9.8 फीसदी रही थी। वहीं, देश में महामारी को काबू में करने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के कारण अक्तूबर-दिसंबर, 2020 में बेरोजगारी दर काफी अधिक थी। कुल कार्यबल में बेरोजगार व्यक्तियों के प्रतिशत को बेरोजगारी दर (यूआर) कहते हैं। एजेंसी
महिलाओं की बेरोजगारी में गिरावट
एनएसओ के 13वें आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में महिलाओं (15 वर्ष और उससे अधिक आयु) में बेरोजगारी दर भी अक्तूबर-दिसंबर, 2021 में घटकर 10.5 फीसदी रह गई। एक साल पहले समान अवधि में शहरी महिलाओं में बेरोजगारी की दर 13.1 फीसदी रही थी। जुलाई-सितंबर, 2021 में यह आंकड़ा 11.6 फीसदी था।
पुरुषों के मोर्चे पर भी राहत
इसी तरह, शहरी क्षेत्रों में पुरुषों में बेरोजगारी दर भी कम होकर 8.3 फीसदी रह गई, जो अक्तूबर-दिसंबर, 2020 में 9.5 फीसदी रही थी। यह आंकड़ा जुलाई-सितंबर, 2021 में 9.3 फीसदी था। शहरी क्षेत्रों में सीडब्ल्यूएस (वर्तमान साप्ताहिक स्थिति) में श्रम बल भागीदारी दर अक्तूबर-दिसंबर, 2021 तिमाही में सालाना आधार पर 47.3 फीसदी पर अपरिवर्तित रही। जुलाई-सितंबर, 2021 में यह आंकड़ा 46.9 फीसदी था।
अप्रैल में गांवों के मुकाबले शहरों में बढ़ी बेरोजगारी
बेरोजगारी के मामले में गांवों के मुकाबले शहरों की हालत ज्यादा खराब है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक, शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर अप्रैल, 2022 में बढ़कर 9.22 फीसदी पहुंच गई। मार्च में यह 8.28 फीसदी रही थी। इस दौरान ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर मार्च के 7.29 फीसदी से घटकर 7.18 फीसदी पर आ गई।