फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Supreme Court: राजस्थान सरकार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कोरोना से अनाथ हुए बच्चों को दो हफ्तों में मुआवजा दें

Sat, 15 Oct 2022 12:56 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

शीर्ष कोर्ट ने पिछली सुनवाई में राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि कोरोना पीड़ितों को मुआवजा देकर वह कोई अहसान नहीं कर रही है।
विज्ञापन
Supreme Court - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि कोरोना से अनाथ हुए बच्चों को दो सप्ताह के अंदर मुआवजा दे। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सामने मुआवजे के खारिज हुए आवेदनों की पूरी जानकारी भी दो सप्ताह में पेश करे। 

विज्ञापन


शीर्ष कोर्ट ने विधिक सेवा प्राधिकरण से कहा है कि वह संबंधित आवेदनों पर विचार कर चार सप्ताह के अंदर उचित फैसला ले। शीर्ष कोर्ट ने पिछली सुनवाई में राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि कोरोना पीड़ितों को मुआवजा देकर वह कोई अहसान नहीं कर रही है। राजस्थान सरकार ने शीर्ष कोर्ट को बताया था कि उसने कोरोना से अनाथ हुए कुल 718 में से 191 बच्चों को मुआवजा दिया है। 

आत्महत्या से हुई मौतों में 8047 को मुआवजा
राज्य सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आत्महत्या से हुई मौतों के मामले में जिला स्तर पर 9077 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 8047 को स्वीकृत किया गया है। 551 लंबित हैं और 479 को खारिज कर दिया गया है। 
विज्ञापन


सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप
शीर्ष अदालत वकील गौरव कुमार बंसल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में राजस्थान सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह कोविड मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 2021 के आदेश का पालन नहीं कर रही है। इस आदेश में शीर्ष अदालत ने कोरोना से हुई मौतों के मामले में मृतक आश्रितों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था। बंसल ने अनुरोध किया था कि सुप्रीम कोर्ट इस बारे में राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगे। 

Trending Videos
विज्ञापन

राजनीतिक दलों के मुफ्त रेवड़ियों के मामले पर तत्काल सुनवाई नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त की रेवड़ियों के वादे के मामले में तत्काल सुनवाई करने की कोई जरूरत नहीं है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और जस्टिस हेमंत गुप्ता के सामने हिमाचल और गुजरात के आगामी चुनावों का हवाला देते हुए मामले में जल्द सुनवाई की अपील की थी।

चीफ जस्टिस ललित ने इस पर कहा कि तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने मामले से संबंधित फाइलों को अपने चेंबर में भेजने के लिए कहा। इससे पहले पूर्व मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की पीठ ने कहा था कि मुफ्त रेवड़ियों के मामले में व्यापक बहस की जरूरत है। उन्होंने तब इस मामले को तीन जजों की पीठ को भेज दिया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें