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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अवैध निर्माण से लोग मर रहे हैं लेकिन अथॉरिटी को कोई चिंता नहीं 

Sat, 25 Aug 2018 05:10 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली 
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि है दिल्ली समेत देश के तमाम शहरों में अवैध निर्माण का सिलसिला इसलिए जारी है कि लोगों को लगता है कि आज न कल उनके अवैध निर्माण को नियमित कर ही दिया जाएगा। लोगों की इस उम्मीद के कारण ये सब हो रहा है।  

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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि आखिर यह कब तक चलता रहेगा। कानून तोडने वालों को फायदा पहुंचता रहेगा तो अवैध निर्माण का सिलसिला कैसे रुकेगा? इसे लेकर सरकारी अथॉरिटी में गंभीरता के अभाव पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोग मर रहे हैं लेकिन किसी को इसकी परवाह नहीं है।  

अवैध निर्माण के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे हादसों का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा कि पिछले दिनों मुंबई के हुए कमला मिल में हुए हादसे से भी सबक नहीं लिया। हजारों बिलंर्डग अवैध है लेकिन अथॉरिटी को इसकी चिंता नहीं है। आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से बिल्डिंग गिरने या हादसे की खबर आती है।  
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पीठ ने कहा 'आखिर बिना अथॉरिटी केक्लीयेंस के ऊंची इमारतें कैसे बन रही है। अनधिकृत निर्माण के कारण लोग मर रहे हैं। दो दिन पहले मुंबई की एक इमारत में आग लग गई । हमने बाद में पढ़ा कि इस इमारत को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट ही नहीं था।’  

पीठ ने कहा कि हम दिल्ली में अवैध निर्माण के मसले पर परीक्षण कर रहे हैं लेकिन देश के दूसरे शहरों में ही हाल कमोवश ऐसा ही है। आखिर इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नादकर्णी ने कहा कि टाउन प्लानिंग विभाग और नागरिक निकायों में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण ऐसा हो रहा है।

इस पर पीठ ने कहा कि तो सरकार क्या कर रही है। आखिर सरकार ने इस संबंध में क्या कदम उठाए। सरकार कुछ करती नहीं है और अगर हम कुछ करते हैं तो उसे न्यायिक सक्रियता कहा जाता है। आखिर किसी न किसी को तो करना है। आखिर ऐसा कब तक चलता रहेगा? जवाब में संबंधित हाईकोर्ट को इस पर निगरानी करनी चाहिए। 

सुनवाई के दौरान मॉनिटिरिंग कमेटी ने अपनी नई रिपोर्ट पेश करते हुए दिल्ली की विभिन्न हिस्सों में पिछले दिनों हुई कार्रवाई का ब्योरा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, बुराड़ी, भाटी माइन्स, किशगढ़ सहित अन्य इलाकों में कार्रवाई की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी के अलग-अलग हिस्सों पर बड़े पैमाने पर डीडीए या सरकारी जमीन पर कब्जा है। यह भी बताया गया कि कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशन के पास सरकारी जगहों पर कब्जा है। रिपोर्ट पर गौर करने केबाद पीठ ने टास्क फोर्स को मॉनिटिंरिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।  

संशोधित मास्टर प्लान के तहत एसडीएमसी इलाके में दुकानों को नियमित करने की कार्रवाई पर रोक 
सुनवाई के दौरान नियुक्त न्याय-मित्र (अमाइकस क्यूरी) वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि अखबारों में माध्यम से उन्हें जानकारी मिली है कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम इलाके को लेकर एक सर्कुलर जारी किया गया जिसमें संशोधित मास्टर प्लान के तहत कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नियमित करने की बात है।

उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लिहाजा इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। इस पर पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण से इस बारे में जानना चाहा। लेकिन डीडीए की ओर से कोई वकील पेश न होने के कारण एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नादकर्णी ने सुनवाई सोमवार तक टाल दी जाए।

उन्होंने कहा कि वह खुद शहरी विकास मंत्रालय के सचिव से इस संबंध में बातचीत करेंगे और उन्हें सलाह देंगे कि संशोधित मास्टर प्लान के तहत किसी तक कार्रवाई न हो। अगली सुनवाई मंगलवार को होगी। 

रिहायशी इलाकों से फैक्ट्रियां हटाने को लेकर मॉनिटिरिंग कमेटी से मांगी जानकारी 
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि दिल्ली में अब भी कई रिहायशी इलाकों में फैक्ट्रियां चल रही है। पीठ ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2004 में रिहाशी इलाकों से फैक्ट्रियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने का आदेश दिया था लेकिन ऐसा लगता है कि सही तरीके से इस आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है।

पीठ ने सरकार से पूछा कि आखिर इस आदेश का प्रभावी तरीके से पालन क्यों नहीं किया गया? पीठ ने अमाइकस क्यूरी से यह जानना चाहा कि इस संबंध में गठित मॉनिटिरिंग कमेटी में कौन-कौन हैं। जवाब में अमाइकस क्यूरी ने बताया कि दिल्ली के मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त, निगम आयुक्त और डीडीए के वाइस चेयरमैन इस कमेटी के सदस्य हैं।

इस पर पीठ ने कमेटी के सभी सदस्यों को हस्ताक्षर समेत रिपोर्ट पेश कर यह बताने के लिए कहा गया है कि आखिर वर्ष 2004 केआदेश का कितना पालन हुआ है। आखिर अब भी रिहायशी इलाकों में फैक्ट्रियां कैसे चल रही हैं? 

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