शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि भविष्य में किसी भी मुकदमे की कारवाई की रोक छह महीने की अवधि तक के लिए ही लगाई जाएगी। यदि रोक छह महीने से अधिक होती है तो अदालत को आदेश पारित करना होगा। आदेश में बताना होगा कि वह मामला क्यों अपवाद है और ट्रायल पर रोक उसके निपटारे से अधिक महत्वपूर्ण क्यों है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मुकदमों पर रोक की अवधि छह महीने के बाद खत्म हो जाए तो ट्रायल कोर्ट को खुद बिना किसी इंतजार के कार्यवाही शुरू कर देनी होगी।
शीर्ष अदालत ने कहा है कि किसी मामले में आरोप तय होने का
आदेश पारित किया जाता तो वह आदेश न तो अंतरिम होता है और न ही अंतिम। हाईकोर्ट के समक्ष जब मामला परीक्षण के लिए आए तो हाईकोर्ट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मामले के जल्द निपटारे में अनावश्यक बाधा न हो।
शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट भी इस संबंध में निर्देश जारी कर सकता है। साथ ही हाईकोर्ट यह निगरानी कर सकता है कि दीवानी या आपराधिक मामले लंबे समय तक लंबित न पड़े रहें। शीर्ष अदालत ने इस आदेश की प्रति सभी हाईकोर्ट तक पहुंचाने के लिए कहा है जिससे कि इस संबंध में जरूरी कदम उठाए जा सकें।