जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा, सिर्फ कानून और व्यवस्था के उल्लंघन की आशंका ‘सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव’ को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने के मानक को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। हम मानते हैं कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं, लेकिन नजरबंदी आदेश 1986 के तेलंगाना कानून के आधार पर बिना सूझबूझ के जारी किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार के एक नजरबंदी अपदेश को खारिज करते हुए कहा, सार्वजनिक व्यवस्था कायम रखने के लिए नजरबंदी के नाम पर किसी आरोपी की व्यक्तिगत आजादी को बलिदान पर नहीं चढ़ा सकते। तेलंगाना सरकार ने नौकरी तलाश रहे हजारों लोगों को चूना लगाने के मामले में 19 मई 2021 को आरोपी की नजरबंदी का आदेश जारी किया था।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा, सिर्फ कानून और व्यवस्था के उल्लंघन की आशंका ‘सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव’ को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने के मानक को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। हम मानते हैं कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं, लेकिन नजरबंदी आदेश 1986 के तेलंगाना कानून के आधार पर बिना सूझबूझ के जारी किया गया है।
इस टिप्पणी के साथ ही पीठ ने हाईकोर्ट के 25 जनवरी को आए फैसले को भी रद्द कर दिया जिसमें आरोपी को नजरबंदी से राहत देने से इनकार किया गया था। साथी ही 19 मई 2021 को आया प्रदेश सरकार का नजरबंदी आदेश भी खारिज किया जाता है। पीठ ने कहा, किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही चल रही है यह उसे नजरबंद करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं है।