याचिकाकर्ता ने 13 नवंबर 2020 को जारी उस आदेश को रद्द करने की मांग की है जिसमें मिश्रा का कार्यकाल संशोधन कर एक और साल के लिए बढ़ा दिया गया। दवे ने कहा कि मिश्रा का सेवा विस्तार प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मजाक है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा को सेवा विस्तार देने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया।
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जस्टिस नागेश्वर राव की पीठ ने याचिकाकर्ता, केंद्र सरकार और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा और उन्हें अपना पक्ष लिखित में रखने को कहा।
याचिकाकर्ता एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि मिश्रा को अब कोई विस्तार नहीं दिया जा सकता है क्योंकि वह पहले ही अपने पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और एक विस्तार भी मिल चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे गैरकानूनी विस्तारों से ईडी निदेशक कार्यालय की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा।
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याचिकाकर्ता ने 13 नवंबर 2020 को जारी उस आदेश को रद्द करने की मांग की है जिसमें मिश्रा का कार्यकाल संशोधन कर एक और साल के लिए बढ़ा दिया गया। दवे ने कहा कि मिश्रा का सेवा विस्तार प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मजाक है।
उन्होंने विनीत नारायण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार 2019 के आदेश को संशोधित करती है और सेवा विस्तार की अवधि को दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करती है। इसके बावजूद मई 2020 में सेवानिवृत्त होनेवाले अधिकारी को 2021 तक फिर से नियुक्त किया जाता है।
उन्होंने पूछा कि क्या सरकार नियमों और सांविधानिक जनादेश का उल्लंघन कर सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार और अन्य के केस में दिए गए दिशानिर्देशों से बाध्य है और सेवा विस्तार आगे नहीं दिया जा सकता।