आप दिल्ली हाईकोर्ट को कोई फंड नहीं देना चाहते? हमें बृहस्पतिवार तक मंजूरी चाहिए। यह एक मॉडल हाईकोर्ट है और हालत देखिये। जजों की ट्रेनिंग हो रही है और कोई अदालत कक्ष नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए दिल्ली हाईकोर्ट और जिला अदालत को धन उपलब्ध कराने में ढुलमुल रवैये को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इस मुद्दे पर मंगलवार को बैठक बुलाने को कहा।
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सीजेआई की तीन सदस्यीय पीठ ने पूछा, यह क्या हो रहा है? आपकी सरकार क्या कर रही है? आप दिल्ली हाईकोर्ट को कोई फंड नहीं देना चाहते? हमें बृहस्पतिवार तक मंजूरी चाहिए। यह एक मॉडल हाईकोर्ट है और हालत देखिये। जजों की ट्रेनिंग हो रही है और कोई अदालत कक्ष नहीं है।
हाईकोर्ट में अपर्याप्त सुविधाओं बनीं समस्या
शुरुआत में, वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि अभियोजकों और जजों को हाईकोर्ट में अपर्याप्त सुविधाओं के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि शहर की जिला न्यायपालिका में 887 की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 813 न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं। न्यायिक अधिकारियों के लिए 118 अदालत कक्षों और आवासीय क्वार्टरों की भी कमी है।
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पीठ ने कहा, दिल्ली जिला न्यायपालिका की मांगों को पूरा करने में दिल्ली सरकार के उदासीन रवैये के लिए हमें कोई कारण या औचित्य नहीं मिलता है। हम दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को इस मुद्दे पर कल एक बैठक बुलाने का निर्देश देते हैं।