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परमबीर सिंह को झटका: 'जिनके घर कांच के हों, वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते', सुप्रीम कोर्ट की फटकार

Fri, 11 Jun 2021 02:49 PM IST
प्रशांत कुमार राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एंटीलिया केस में आरोपी सचिन वझे ने एक पत्र में देशमुख पर वसूली के लिए कहने का आरोप लगाया था इसी को आधार बनाकर मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर ने सिंह ने केस ट्रांसफर करने के लिए अर्जी लगाई। शीर्ष कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से मना कर दिया है। 
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परमबीर सिंह को झटका - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सिंह से कहा कि जिनके घर शीशे के हो वो दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते हैं। परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उनके खिलाफ शुरू किए गए सभी जांचों को महाराष्ट्र के बाहर स्थानांतरित करने की गुहार लगाई थी।

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जस्टिस हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने परमबीर सिंह से कहा,  'आप महाराष्ट्र आईपीएस कैडर का हिस्सा हैं। आपने 30 साल राज्य की सेवा की है। अब आप यह नहीं कह सकते कि आप राज्य के बाहर अपनी पूछताछ चाहते हैं। आपको अपने पुलिस बल पर संदेह नहीं होना चाहिए।' पीठ ने कहा है कि अब आपको अपने राज्य पर भरोसा नहीं है। एक चौंकाने वाला आरोप है। पीठ ने कहा, ' जिनके घर शीशे के हो वो दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं मारते।' पीठ ने कहा कि इस याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है। शीर्ष अदालत के रुख को देखते हुए सिंह के वकील महेश जेठमलानी ने याचिका को वापस ले लिया।

देशमुख के खिलाफ शिकायत वापस नहीं लेने का बढ़ रहा दबाव
परमबीर सिंह ने अपनी याचिका में कहा था कि जब से उन्होंने  तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख द्वारा 100 करोड़ रुपये मासिक जबरन वसूली का लक्ष्य दिए जाने का आरोप लगाया है तब से उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया था कि जब तक वह देशमुख के खिलाफ अपनी शिकायत वापस नहीं लेते तब तक उन्हें फंसाया जाता रहेगा। सिंह ने गुहार लगाई थी कि उनके खिलाफ शुरू की गई जांच सीबीआई को सौंप दी जाए। 
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गौरतलब है कि 100 करोड़ की वसूली के आरोपों में घिरे पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच कर रही है। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने देशमुख पर वसूली का टारगेट देने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद राज्य में सियासी  घमासान मच गया था। विपक्ष के दबाव को देखते हुए अनिल देशमुख को गृहमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच जारी
उसके बाद परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाकर जांच करने की मांग की। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच शुरू की। इस जांच के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार और अनिल देशमुख ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और उसके पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की अर्जी खारिज कर दी थी। दोनों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 100 करोड़ की वसूली के आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था। 

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