क्या 2022 PMLA फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता है?- सुप्रीम कोर्ट
2022 PMLA फैसले पर पुनर्विचार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस बात की जांच करेगा कि क्या 2022 PMLA फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता है? बता दें कि 2022 में दिए गए इस फैसले में पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल संपत्ति को गिरफ्तार करने और कुर्क करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शक्तियों को बरकरार रखा गया था।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की एक विशेष पीठ ने कहा कि उस फैसले में दी गई छूट सीमित थी क्योंकि तीन न्यायाधीशों की पीठ पहले ही धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) से संबंधित कुछ मुद्दों को संबोधित कर चुकी थी। अब मुद्दा यह है कि क्या किसी भी चीज पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट में वकालत की मंजूरी
ओडिशा हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस मुरलीधर अब सुप्रीम कोर्ट में वकालत करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की 16 अक्तूबर को आयोजित एक पूर्ण पीठ की बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। संविधान के अनुच्छेद 220 के तहत हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश केवल सुप्रीम कोर्ट या उन हाईकोर्ट में वकालत कर सकते हैं, जहां उन्होंने जज के रूप में काम न किया हो।
पूर्व जस्टिस एस मुरलीधर ने इस साल अगस्त में अपनी सेवानिवृत्ति से पहले जनवरी 2021 से अगस्त 2023 के बीच ओडिशा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। अपने 17 साल के लंबे कार्यकाल के दौरान, उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में भी कार्य किया। जस्टिस मुरलीधर ने चेन्नई से वकील के तौर पर 1984 में अपना कॅरिअर शुरू किया था। वर्ष 2006 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट में जज बनाया गया। अपने अहम फैसले में मुरलीधर ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को सिख दंगों के मामले में दोषी ठहराने वाली बेंच की अध्यक्षता के अलावा कई अहम फैसले सुनाए।