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आम्रपाली समूह : निदेशकों के खिलाफ 80 से अधिक मामलों को एक साथ करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Tue, 22 Mar 2022 03:22 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

पीठ ने कहा, पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आम्रपाली के हर घरखरीदार को उसका फ्लैट मिले।
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सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला लेते हुए सोमवार को आम्रपाली समूह व उसके निदेशकों के खिलाफ घर खरीदारों के 80 से अधिक आपराधिक मामलों को स्थानांतरित या एक जगह करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, ऐसा करने से ट्रायल जजों की मुश्किलें बढ़ेंगी। 

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जस्टिस उदय उमेश ललित की पीठ के समक्ष जेल में बंद आम्रपाली समूह के अधिकारी शिव प्रिया के वकील बृजेंद्र चाहर की दलीलाें से असहमति जताई। वकील ने कोयला घोटाला मामले की तर्ज पर इस मामले के सभी आपराधिक मुकदमो को एक कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की थी।

इस पर पीठ ने कहा, कोयला घोटाले में सरकारी कर्मचारी आरोपी थे और भ्रष्टाचार रोधी कानून में यह सुविधा थी कि एक जैसे सभी मामलों पर एक जगह सुनवाई हो। मौजूदा मामले में समूह के पूर्व निदेशक आरोपी हैं और इसमें ऐसा नहीं हो सकता। हर शिकायतकर्ता का अलग पहलू होगा और इससे अदालत की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। पीठ ने पूछा यह न्याय के उद्देश्य में कैसे मदद करेगा। ट्रायल जजों के लिए आदेश सुनाना भी मुश्किल हो जाएगा। हम आपकी अर्जी नहीं मान सकते।
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पीठ ने कहा, एक ऐसी शक्ति होनी चाहिए जहां हम सब कुछ एक क्षेत्राधिकार में निहित कर सकें। इस पर चाहर ने कहा, अधिकतर शिकायतें एक ही प्रवृत्ति की हैं और सब में धोखाधड़ी के आरोप हैं। इस पर पीठ ने कहा, परियोजनाएं और उनमें शामिल कंपनियां अलग हो सकती हैं। ऐसे में सुनवाई मुश्किल हो जाएगी।  

पहली प्राथमिकता हर आम्रपाली के हर खरीदार को मिले फ्लैट
पीठ ने कहा, पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आम्रपाली के हर घरखरीदार को उसका फ्लैट मिले। सुनवाई के दौरान कोर्ट रिसीवर आर वेंकटरमानी ने पीठ को बताया कि प्रारंभिक सूची में 8000 के करीब फ्लैट की जानकारी जारी की गई है जिन पर किसी भी खरीदार ने दावा नहीं किया या फिर इन्हें फर्जी नाम के साथ बुक किया गया होगा।

अब तक करीब 4000 दावेदार सामने आए हैं और हम उनके करार को अंतिम रूप दे रहे हैं। अभी भी 4000 के करीब फ्लैट खाली हैं और हमें उम्मीद है कि अगले दो हफ्ते या दस दिन में कुछ लोग और आगे आएंगे, जिसके बाद 3000 फ्लैट ही बिना दावे वाले रह जाएंगे। इन फ्लैटों को बिना बिका हुआ मानकर इनकी नीलामी की जाएगी ताकि और रकम जुटाई जा सके। 

अब तक 900 करोड़ रुपये घर खरीदारों से आए 
वेंकटरमानी ने पीठ को बताया कि अब तक घरखरीदारों ने तय प्लान के तहत 900 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। अभी और पैसों की जरूरत है। करीब 700 करोड़ रुपये के फ्लैट कम कीमत पर बेचे गए। वहीं 300 से 500 मामले ऐसे सामने आए हैं जहां एक ही फ्लैट को कई खरीदारों के नाम पर बुक किया गया। इसकी जांच चल रही है।

पीठ ने कहा, घरखरीदारों को जितना तय हुआ था उतना भुगतान करना चाहिए। हम मानते हैं कि धोखाधड़ी हुई और हम उन्हें पकड़ेंगे भी लेकिन यह भी जरूरी है कि घरखरीदार अपना बकाया भुगतान करें। 

आरबीआई ने की खरीदारों के खाते एनपीए घोषित करने पर लगी रोक हटाने की मांग 
आरबीआई ने पीठ से उसके पिछले साल अगस्त में आए उस आदेश में बदलाव की मांग की जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों के खातों को एनपीए घोषित करने पर रोक लगाई थी। आरबीआई के वकील केवी विश्वनाथन ने कहा, एनपीए की घोषणा पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। आम्रपाली परियोजनाओं के लिए बैंकों की फंडिंग व्यवस्था उचित नहीं है क्योंकि इसकी कोई सॉवरेन गारंटी नहीं है।
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आरबीआई ने दलील दी कि अंतत: ये जमाकर्ताओं का पैसा है और यदि ऐसी व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो यह हितधारकों को प्रभावित करेगा।

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