वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है, शराब सिगरेट से 10 गुणा अधिक हानिकारक है। अदालत के आदेशानुसार सिगरेट के पैकेट पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियां अनिवार्य हैं।
सिगरेट और गुटखे की तरह शराब की बोतलों पर भी वैधानिक चेतावनी लिखे जाने से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यह नीतिगत मामला है। इसके बाद याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका को वापस ले लिया है।
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वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है, शराब सिगरेट से 10 गुणा अधिक हानिकारक है। अदालत के आदेशानुसार सिगरेट के पैकेट पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियां अनिवार्य हैं और ऐसा ही निर्देश इस मामले में भी दिया जा सकता है। याचिका में मांग की गई थी कि सिगरेट की तरह शराब की बोतलों पर भी स्वास्थ्य को लेकर वैधानिक चेतावनी लिखी जाए और इस संबंध में अधिकारियों को निर्देशित किया जाए।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए सीजेआई यूयू ललित ने कहा, यह नीतिगत विषय है। वैसे भी शराब के बारे में कई लोग कहते हैं कि थोड़ी मात्रा में इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने कहा कि इस तरह के फैसले सरकार के नीति निर्माण क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। ऐसे में अदालतें नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगी।