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एनसीएलटी की व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बेंचों का मांगा ब्योरा, पूछा- बिना सुविधा कैसे चलेगा ट्रिब्यूनल?

Mon, 21 Sep 2026 04:43 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एनसीएलटी में सदस्यों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी क्षेत्रीय और सर्किट बेंचों की सुविधाओं का विस्तृत ब्योरा और स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
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एनसीएलटी की व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट सख्त - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में सदस्यों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। एनसीएलटी बार एसोसिएशन, दिल्ली ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल कर ट्रिब्यूनल की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया।

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यह मामला सुप्रीम कोर्ट की स्वत: संज्ञान कार्यवाही से जुड़ा है। इसमें एनसीएलटी में न्यायिक और तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति, बुनियादी ढांचे की कमी और इससे जुड़े अन्य मुद्दों पर सुनवाई हो रही है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

स्वीकृत 63 पदों में 50 सदस्य ही कार्यरत
एनसीएलटी बार एसोसिएशन ने कोर्ट को बताया कि ट्रिब्यूनल में सदस्यों की भारी कमी है। स्वीकृत 63 सदस्यों की संख्या के मुकाबले फिलहाल 50 सदस्य ही कार्यरत हैं। इनमें राष्ट्रपति समेत 27 न्यायिक सदस्य और 23 तकनीकी सदस्य शामिल हैं। बार ने यह भी बताया कि दिसंबर 2027 तक 18 सदस्यों के सेवानिवृत्त होने की संभावना है। ऐसे में रिक्त पदों और बेंचों के सुचारु संचालन को लेकर स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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246 प्रशासनिक कर्मचारी अस्थायी आधार पर नियुक्त
बार एसोसिएशन ने एनसीएलटी में स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। कोर्ट को बताया गया कि ट्रिब्यूनल में कार्यरत सभी 246 प्रशासनिक कर्मचारी, जिनमें कोर्ट मास्टर्स भी शामिल हैं, फिलहाल अस्थायी आधार पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा कई एनसीएलटी बेंचों में स्थायी भवन, समर्पित जजमेंट राइटर्स और पर्याप्त तकनीकी सुविधाओं की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- बिना सुविधाओं के कैसे चलेगा ट्रिब्यूनल?
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी की कार्यप्रणाली और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने सवाल किया कि जरूरी बुनियादी ढांचे, स्थायी भवन, पर्याप्त सहायक कर्मचारियों और जजमेंट राइटर्स के अभाव में ट्रिब्यूनल अपने न्यायिक कार्यों को प्रभावी तरीके से कैसे संचालित कर सकता है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने अटॉर्नी जनरल से मिले निर्देशों के आधार पर मामले को अगली तारीख पर सुनने का अनुरोध किया, ताकि सरकार कोर्ट की ओर से उठाई गई चिंताओं पर उचित कदम उठा सके।

सभी बेंचों का डेटा जुटाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एनसीएलटी की सभी क्षेत्रीय और सर्किट बेंचों में उपलब्ध बुनियादी ढांचे से जुड़ा व्यापक डेटा जुटाकर रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। इसमें प्रधान पीठ की जानकारी भी शामिल होगी।

कोर्ट ने सरकार से एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। रिपोर्ट में प्रधान, क्षेत्रीय और सर्किट बेंचों पर उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सुविधाओं का विवरण देना होगा।

सरकार को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एनसीएलटी की बुनियादी ढांचे और अन्य आवश्यकताओं की तत्काल पहचान करने को कहा है। सरकार को NCLT के अध्यक्ष के साथ विचार-विमर्श कर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

बार की ओर से इन वकीलों ने रखा पक्ष
एनसीएलटी बार एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव सेन, अधिवक्ता सौरभ कालिया (सचिव, NCLT बार एसोसिएशन), अधिवक्ता उज्ज्वल बनर्जी (AOR), अधिवक्ता स्वप्निल गुप्ता के साथ अधिवक्ता वैभव मेंदिरत्ता और अधिवक्ता अभिश्रुत सिंह ने पक्ष रखा।

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