याचिका में तर्क दिया गया, इस तथ्य के बावजूद कि ये प्रेस ब्रीफिंग देश में विभिन्न विकासों के बारे में आम जनता के लिए जागरूकता और शिक्षा पैदा करने का एक अहम तरीका है।
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर केंद्र और राज्य सरकारों को सरकार द्वारा आयोजित सभी आधिकारिक प्रेस वार्ताओं में सांकेतिक भाषा के दुभाषिए उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई है। अधिवक्ता एम करपगम द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआइएल) में कहा गया है कि भारत में आयोजित सभी प्रेस ब्रीफिंग न तो समावेशी हैं और न ही सुलभ हैं।
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याचिका में तर्क दिया गया, इस तथ्य के बावजूद कि ये प्रेस ब्रीफिंग देश में विभिन्न विकासों के बारे में आम जनता के लिए जागरूकता और शिक्षा पैदा करने का एक अहम तरीका है। शीर्ष न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि सांकेतिक भाषा वह सेतु है जो अन्य लोगों को उन लोगों की दुनिया से जोड़ती है जिनकी सुनने की क्षमता है। साथ ही सुनने में अक्षम व्यक्तियों के लिए सांकेतिक भाषा तक पहुंच संचार बाधाओं को तोड़ने और किसी और की तरह समाज में भाग लेने की कुंजी है।