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Explainer: आम लोगों पर पैलेट गन चलाने पर बवाल, सुप्रीम कोर्ट में उठे सवाल; क्यों अदालत ने नहीं रोका इस्तेमाल?

Thu, 30 Jul 2026 02:57 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की गई है, उसमें पैलेट गन पर रोक लगाने को लेकर क्या मांग है और यह क्यों की गई? इसे लेकर याचिकाकर्ता की तरफ से क्या तर्क दिए गए? सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर क्या निर्देश जारी किए? अदालत ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार क्यों कर दिया? आइये जानते हैं...
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पैलेट गन का मामला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संसद के मानसून सत्र में नीट पेपर लीक, छात्र आंदोलन में सख्ती के बाद अब प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (30 जुलाई) को पैलेट गन से ही जुड़े एक मामले में सुनवाई हुई। अदालत में एक याचिका दायर कर पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने पैलेट गन को लेकर इस तरह के दिशा-निर्देश जारी करने से साफ इनकार कर दिया। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की गई है, उसमें पैलेट गन पर रोक लगाने को लेकर क्या मांग है और यह क्यों की गई? इसे लेकर याचिकाकर्ता की तरफ से क्या तर्क दिए गए? सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर क्या निर्देश जारी किए? अदालत ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार क्यों कर दिया? आइये जानते हैं...

पहले जानें- किसने दायर की याचिका?

यह याचिका पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त-सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और पैलेट गन से घायल हुए दो प्रदर्शनकारियों- प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी की ओर से दायर की गई।


किस घटना की वजह से पैलेट गन के खिलाफ दायर हुई याचिका?

यह याचिका 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा की गई कार्रवाई की घटना को लेकर दायर की गई। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से नीट परीक्षा के पेपर लीक विवाद के विरोध में आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से संसद चलो मार्च का नाम दिया गया था, जो जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के पास आयोजित किया गया था।

ये भी पढ़ें: Supreme Court: पैलेट गन से घायल हुए लोगों का इलाज कराए दिल्ली सरकार, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

याचिका में कहा गया है कि भीड़ प्रबंधन के लिए दिल्ली पुलिस की सहायता के लिए तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया, और उसके बाद धातु के छर्रों वाली पंप-एक्शन गन से फायरिंग की। इस फायरिंग के कारण कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं। इनमें प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी भी शामिल थे, जिनके शरीर से सर्जरी के जरिए धातु के छर्रे निकाले गए।


पैलेट गन के खिलाफ याचिका में क्या रहीं मुख्य मांगें?

पूर्ण प्रतिबंध की मांग: नागरिक सभाओं को तितर-बितर करने और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए पूरी तरह या आंशिक रूप से धातु से बने पैलेट गन (पंप-एक्शन या प्रोजेक्टाइल एक्शन गन) के इस्तेमाल पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग। याचिकाकर्ताओं की वकील वृंदा ग्रोवर ने अपनी राहत की मांग को खास तौर पर धातु पैलेट पर प्रतिबंध तक सीमित रखा।

मुआवजा और इलाज: घटना में घायल हुए सभी व्यक्तियों के लिए मुआवजे, जरूरी चिकित्सा उपचार और पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) की भी मांग की गई।

याचिकाकर्ताओं ने इन मांगों के पीछे क्या वजह बताई?

  • याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पैलेट गन का इस्तेमाल बल प्रयोग के सांविधानिक मानकों के खिलाफ है। यह शांतिपूर्ण सभा करने के मौलिक अधिकार- अनुच्छेद 19(1)(बी) पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत, आनुपातिकता र तार्किकता के सांविधानिक परीक्षणों में विफल रहता है।
  • याचिका में बताया गया है कि पैलेट गन एक बड़े क्षेत्र में सैकड़ों छर्रे छोड़ती है, जिससे सटीक निशाना लगाना असंभव हो जाता है। इससे प्रदर्शनकारियों की आंखों और शरीर के अन्य अहम अंगों पर गंभीर, जानलेवा और स्थायी चोट लगने का भारी जोखिम रहता है। यह इसे भीड़ नियंत्रण के लिए एक अनुचित और खतरनाक हथियार बनाता है। 
  • याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान बल प्रयोग और पैलेट गन चलाने से पहले कोई पूर्व चेतावनी या घोषणा नहीं की गई थी। आरोप लगाया कि जवानों ने अकस्मात ही पैलेट गन से फायरिंग शुरू कर दी।
  • याचिका इसलिए भी दाखिल की गई, ताकि पैलेट गन से घायल हुए सभी पीड़ितों को जरूरी मुआवजा, चिकित्सा उपचार और उनके लिए पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।

पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। - फोटो : अमर उजाला

सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन के खिलाफ याचिका पर क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने कुछ और अहम निर्देश दिए। 

1. प्रतिबंध की मांग को लेकर
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग अस्पष्ट है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस नियमों, जैसे बीपीआरडी एडवाइजरी में असाधारण परिस्थितियों में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए इन हथियारों के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। कोर्ट ने कहा कि जब तक उन पुलिस नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक इनके इस्तेमाल को अवैध नहीं माना जा सकता और प्रतिबंध की राहत देना मुश्किल है। इसके साथ ही, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिका में संशोधन करके इन नियमों को चुनौती देने का भी निर्देश दिया।

2. 'स्थिति के तहत' कार्रवाई पर जोर
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कई बार शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भी असामाजिक तत्वों की घुसपैठ हो सकती है, जिससे प्रदर्शन हिंसक हो सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने और मौके पर फैसला लेने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को कभी-कभी स्थिति के तहत कार्रवाई करनी पड़ सकती है।

कोर्ट ने कहा कि वह किसी विशेष घटना, जैसे 20 जुलाई की घटना में पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच करने के खिलाफ नहीं है, लेकिन याचिकाकर्ताओं को यह साबित करना होगा कि बल प्रयोग ग्रेडेड अप्रोच यानी स्थिति के अनुसार क्रमिक कार्रवाई के तहत सही था या नहीं। 
 
3. घायलों के इलाज का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को सख्त निर्देश दिया कि वह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल हुए याचिकाकर्ताओं और अन्य सभी प्रभावित लोगों को बेहतर और पर्याप्त चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करे।
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पैलेट गन - फोटो : Amar Ujala
4. गोला-बारूद के लॉग सुरक्षित रखने का आदेश
कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि जांच के मकसद से घटना वाले दिन जंतर-मंतर पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स के गोला-बारूद के लॉग को सुरक्षित रखा जाए। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि जांच के लिए आवश्यक सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएंगे।

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