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SC: कितने अनाथ बच्चे शिक्षा से वंचित? सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से मांगा आंकड़ा; केंद्र को भी दिया ये सुझाव

Wed, 06 Aug 2025 04:57 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे उन अनाथ बच्चों का सर्वे करें जिन्हें शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के तहत मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा नहीं मिली है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र से 2027 की जनगणना में अनाथ बच्चों के आंकड़े शामिल करने पर भी विचार करने को कहा। 

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक मामले में सुनवाई के दौरान सभी राज्यों को अहम निर्देश दिए। इसके तहत कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिए कि वे उन अनाथ बच्चों का सर्वे करें, जिन्हें शिक्षा का अधिकार कानून 2009 (आरटीई एक्ट) के तहत फ्री और अनिवार्य शिक्षा नहीं मिली है। ये आदेश न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें अनाथ बच्चों की देखभाल और उनके संरक्षण की मांग की गई थी।

याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्या कहा?

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इस दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें उन अनाथ बच्चों का सर्वे करें जिन्हें स्कूलों में प्रवेश मिल चुका है और जिनको अब तक प्रवेश नहीं मिला। कोर्ट ने कहा कि जिन बच्चों को पढ़ाई का अधिकार नहीं मिला, उनके साथ ऐसा क्यों हुआ, यह भी बताया जाए। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा गया कि वो 2027 की जनगणना में अनाथ बच्चों के आंकड़े भी शामिल करने पर विचार करे।

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क्या है याचिकाकर्ता की दलील?
वहीं बात अगर याचिकाकर्ता की करें तो याचिका में गया है कि देश में यूएनआईसीईएफ के अनुसार करीब 2.5 करोड़ अनाथ बच्चे हैं, लेकिन हमारे पास कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कमजोर वर्गों के लिए छात्रवृत्ति, आरक्षण, नौकरियां और लोन की व्यवस्था है, लेकिन अनाथ बच्चों के लिए कोई ठोस नीति नहीं है।

कोर्ट का केंद्र को सुझाव- जनगणना में शामिल करें अनाथ बच्चों का आकड़ा
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि जनगणना में अनाथ बच्चों के लिए एक अलग कॉलम होना चाहिए ताकि सरकार को उनकी सही संख्या का पता चल सके। इस पर मेहता ने जवाब दिया कि अनाथ बच्चे हमारी ज़िम्मेदारी हैं, मैं इस पर जरूर विचार करूंगा।

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25% कोटा में शामिल हों अनाथ
कोर्ट ने यह भी बताया कि कुछ राज्य जैसे गुजरात, दिल्ली, मेघालय और सिक्किम ने पहले से ही अपने राज्य में 25% आरक्षित सीटों में अनाथ बच्चों को शामिल कर लिया है। कोर्ट ने दूसरे राज्यों से भी कहा कि वे इस पर विचार करें और रिपोर्ट दाखिल करें।

चार हफ्तों में राज्यों को देनी होगी रिपोर्ट
बता दें कि कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी राज्य सरकारों को चार हफ्तों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। मामले में अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी। इसको लेकर कोर्ट ने कहा कि जब तक सर्वे चल रहा है, तब तक यह भी सुनिश्चित किया जाए कि जिन बच्चों को स्कूल में दाखिला मिलना चाहिए, उन्हें पास के स्कूल में प्रवेश दिया जाए।

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