सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सिख समुदाय के लोगों को घरेलू उड़ानों में कृपाण ले जाने की अनुमति को चुनौती देने वाली एक याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट का रुख करने को कहा। याचिका ‘हिंदू सेना’ नामक संगठन ने दायर की थी। संगठन ने नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो द्वारा सिख समुदाय को दी गई छूट को भेदभावपूर्ण बताते हुए चुनौती दी थी। जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, आप हाईकोर्ट जा सकते हैं।
मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा कि मुंबई के आरे जंगल में कोई पेड़ नहीं काटा गया है। वहां सिर्फ कुछ खरपतवार, झाड़ियाें और शाखाओं को हटाया गया है।
जस्टिस यूयू ललित की पीठ के समक्ष स्थानीय निवासियों के एक समूह के वकील चंदर उदय सिंह ने दलील दी कि मेट्रो कार शेड परियोजना के लिए आरे वन क्षेत्र में यथास्थिति के आदेशों के बावजूद पेड़ों की कटाई फिर से शुरू कर दी गई है। इस पर पीठ ने कहा, मामले को विस्तार से सुनने की जरूरत है। एमएमआरसीएल की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, क्षेत्र में कोई पेड़ नहीं काटा जा रहा था। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति आदेश के बाद कोई पेड़ नहीं काटा गया। हालांकि, क्षेत्र में खरपतवार और झाड़ियां थीं, जिन्हें संबंधित अथॉरिटी द्वारा हटाया जा रहा था। पीठ अब 13 अगस्त को इस मामले में सुनवाई करेगी।
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को 1991 में बने उपासना स्थल कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया। शीर्ष अदालत में इस मामले पर 9 सितंबर को सुनवाई होगी।
सीजेआई एनवी रमण की पीठ को वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने बताया कि इस याचिका को छह बार हटाया गया है। अब इसे 9 सितंबर को सूचीबद्ध किया जाना है। कृपया आप निर्देश दें कि इसे इस बार हटाया न जाए। भाजपा नेता व वकील अश्विनी उपाध्याय की इस मामले में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 12 मार्च को केंद्र से जवाब मांगा था। हाल ही में 29 जुलाई को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने छह अलग-अलग याचिकाओं पर विचार करने से इन्कार कर दिया था और याचिकाकर्ता को उपाध्याय की लंबित जनहित याचिका में हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल करने को कहा था।