गैरकानूनी गतिविधियां(रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों को चुनौती देने वाले याचिकाओं को वापस लेने की सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी है। सुनवाई के दौरान कहा कि उन्होंने उचित मंचों पर जाने का फैसला लिया है।
गुरुवार को मामले पर सुनवाई करते हुए पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि क्या वे यूएपीए मामलों में एफआईआर को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहते हैं या वे सुप्रीम कोर्ट में कानून को चुनौती देना चाहते हैं। बुधवार को भी दो जजों की पीठ ने कहा था कि वह यूएपीए की शक्तियों को चुनौती देने के लिए प्रॉक्सी मुकदमेबाजी की अनुमति नहीं देंगे। आठ याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दी गई। मामले से जुड़े वकीलों ने कहा कि वे राहत के लिए क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालयों से संपर्क करना चाहेंगे।
याचिकाओं को वापस लेने की दी अनुमति
वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि गिरफ्तारी से सुरक्षा देने वाले 17 नवंबर, 2021 के अंतरिम आदेश को दो सप्ताह के लिए बढ़ाया जाए। न्यायाधीश त्रिवेदी ने कहा कि अदालत ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करने जा रही है, लेकिन मौखिक रूप से त्रिपुरा पुलिस से कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने को कहा है। इस तरह का अनुरोध गैर सरकारी संगठन फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स द्वारा यूएपीए के प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को वापस लेने के लिए किया गया था। पीठ ने एनजीओ की याचिका वापस लेने का अनुरोध स्वीकार कर लिया।